जंतर-मंतर पर नहीं जुट सके CJP के कार्यकर्ता, दिल्ली में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था
दिल्ली में शनिवार को CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा व्यवस्था की। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में करीब 2,000 लोगों को हिरासत में लिया गया । वहीं, कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 1,500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई । इससे पहले पुलिस ने जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की और कई इलाकों में आवाजाही नियंत्रित की। प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे CJP के कार्यकर्ताओं को बसों और अन्य वाहनों से अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया। राजधानी के कुछ हिस्सों में मेट्रो स्टेशन के प्रवेश और निकास पर भी प्रतिबंध लगाए गए।

CJP के प्रमुख नेता भी हिरासत में
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और पार्टी के नेताओं सौरव दास तथा आशुतोष रांका को मुंबई से दिल्ली पहुंचने के बाद हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया। पार्टी ने नेताओं को हिरासत में लिए जाने का विरोध करते हुए इसे अनुचित कार्रवाई बताया और आंदोलन जारी रखने की बात कही।
प्रदर्शन की कवरेज कर रहे कुछ पत्रकारों को भी पुलिस ने थोड़े समय के लिए हिरासत में लिया। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, उसके एक पत्रकार को भी कुछ देर बाद छोड़ दिया गया। इधर CJP ने अपने नेताओं को हिरासत में लिए जाने का विरोध किया और आंदोलन जारी रखने की बात कही। पार्टी ने अभिजीत दिपके की अनुपस्थिति में आगे की जिम्मेदारी अजिंक्य शिंदे को सौंपने की जानकारी भी दी।

घटनाक्रम
CJP का प्रदर्शन मतदाता सूची की शुद्धता, चुनाव आयोग की जवाबदेही और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से जुड़े सवालों को सामने लाता है। एक ओर चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का सत्यापन जरूरी है, वहीं दूसरी ओर विरोध करने वाले समूहों की मांग है कि पात्र मतदाताओं के नाम हटने की आशंका और पुनरीक्षण की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो।

SIR को लेकर क्यों हो रहा है विरोध?
इस पूरे विवाद के केंद्र में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) है। चुनाव आयोग इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को सत्यापित करना और उसमें मौजूद डुप्लिकेट या अपात्र प्रविष्टियों को हटाना बताता है। दूसरी ओर, CJP और कुछ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने से पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट में चुनावी सूची के पुनरीक्षण के दौरान लगभग 13 करोड़ प्रविष्टियां हटाए जाने का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें स्थान बदल चुके मतदाता, जिनका पता नहीं चल पाया और मृत व्यक्तियों से संबंधित प्रविष्टियां शामिल थीं। यह आंकड़ा पुनरीक्षण से जुड़ी प्रविष्टियों का है; इसे इतने ही पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार छिनने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। चुनाव आयोग ने गड़बड़ी के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि पात्र मतदाता अपना नाम दोबारा दर्ज करा सकते हैं।

गृह मंत्रालय ने राज्यों को किया था सतर्क
प्रदर्शन से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पत्र लिखकर संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौतियों को लेकर सतर्क किया था। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने और प्रस्तावित जुटान से सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका का उल्लेख किया था।
इस बीच, दिल्ली में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाई गई। कई प्रमुख सड़कों पर जांच और बैरिकेडिंग की गई। सुरक्षा व्यवस्था के कारण आम यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

क्या आंदोलन खत्म हो गया है?
CJP ने अपने नेताओं को हिरासत में लिए जाने का विरोध किया और आंदोलन जारी रखने की बात कही। पार्टी ने अभिजीत दिपके की अनुपस्थिति में आगे की जिम्मेदारी अजिंक्य शिंदे को सौंपने की जानकारी भी दी।

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