Durgapuja2023

Durgapuja2023: हिंदू और मुस्लिम एकता का प्रतीक है सिंहवाहनी मंदिर, मंदिर के हाते में ही है मजार हिन्दू करते है मजार की सेवा 350 सौ साल से हो रहा है ये प्रथा

 

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Durgapuja2023:  झारखण्ड में एक ऐसा मंदिर है जिसे हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक कहा जा सकता है। इस मंदिर की खासियत यह है की सैकड़ो वर्ष पुराना इस दुर्गा मंदिर के हाते में बना मजार आज भी हिंदू ब्राह्मणों के द्वारा पूजा जाता है, यह अनोखा मंदिर बोकारो जिला के चास मेन रोड स्थित है इसे लोग सिंह वाहिनी दुर्गा मंदिर के नाम से जानते है। करीब 350 सौ वर्षों पुराना यह मंदिर आज भी लोगों में शांति एवं एकता का पैगाम दे रहा है। एक तरफ जहां जहाँ पूरा विश्व जातियों में बटा हुआ है धर्मके नाम पर नफरत का बोलबाला है वहीँ सैकड़ो वर्ष पुराना यह दुर्गा मंदिर भाईचारे का प्रतिक है मंदिर के अंदर बना मजार आज हिंदू ब्राह्मणों के द्वारा पूजा जाता है, मंदिर के संस्थापक परिवार के वंशज अनाथ चंद्र दत्ता के मुताबिक चास के दत्ता परिवार एवं घोषाल परिवार के द्वारा एक तरफ जहां दुर्गा की आराधना की जाती है वहीं एक ही हाते में बना मजार भी है जिसे इन्हीं ब्राह्मणों यूं कहें इन्हीं पुजारी के द्वारा पूजा जाता है। यहां अष्टधातु की दुर्गा माता का प्रतिमा है जिसकी दिन में दो बार पूजा की जाती है।

वही मंदिर के पुजारी बुद्धेश्वर घोषाल ने बताया कि करीब साढ़े तीन सौ साल पहले चास के दत्ता परिवार के पूर्वज घोर दत्ता द्वारा मंदिर की स्थापना करवाई गई थी। माता द्वारा दत्ता परिवार को स्वप्न आया कि वहां मंदिर का स्थापना करो जिसका देखभाल घोषाल परिवार करेगा। पुजारी ने बताया कि इस दुर्गा मंदिर के हाता में ही मजार बना है चास में हिंदू मुस्लिम के भाईचारा का परंपरा चल रहा है मुस्लिम समुदाय के लोग चाह रहे थे कि हम लोग इस मजार को यहां से हटा ले लेकिन दत्ता परिवार इस बात पर राजी नहीं हुआ। दत्ता परिवार का मानना है कि हमारे पूर्वजों द्वारा कहा गया इस मजार को स्थापित किया गया है हम लोग इसको जगह दिए हैं स्थापना किए हैं तो इसका देखभाल भी हम लोग ही करेंगे। मुस्लिम समुदाय के लोग मोहर्रम में ताजिया यहां लाता है प्रसाद चढ़ता है। मुस्लिम समुदाय के लोग साल में दो बार इस मजार पर आज भी आते हैं। पुजारी ने बताया कि यह सिद्ध मंदिर है यहां लोगों की मन्नतें पूरी होती है लोग दूर-दूर से यहां पूजा करने के लिए पहुंचते हैं।

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