झारखंड में फिल्म उद्योग को नई पहचान दिलाने की पूरी संभावना: असीम सिन्हा

नवीन कुमार
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रांची: झारखंड में स्थानीय सिनेमा को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की पूरी संभावना है। इसके लिए राज्य में शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी सिनेमा के लिए सकारात्मक माहौल और मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार करना जरूरी है। यह बात मशहूर फिल्म एडिटर और फिल्मकार असीम सिन्हा ने शनिवार को रांची के सूचना भवन सभागार में आयोजित ‘मीट द मेंटर’ कार्यक्रम में कही।

कार्यक्रम का आयोजन झारखंड फिल्म विकास निगम लिमिटेड (JFDC L) की ओर से किया गया था। असीम सिन्हा ने कहा कि झारखंड में फिल्म उद्योग को विकसित करने के लिए केवल आर्थिक मदद पर्याप्त नहीं होगी। राज्य में फिल्म निर्माण से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी सिनेमा कल्चर विकसित करने की जरूरत है।

उन्होंने स्थानीय कलाकारों और तकनीकी प्रतिभाओं को अधिक अवसर देने पर जोर दिया। उनका कहना था कि स्थानीय फिल्मों को प्रोत्साहित करने के लिए सीड फंडिंग की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके साथ ही फिल्मों और स्क्रिप्ट के मूल्यांकन के लिए बेहतर प्रणाली विकसित करने और नए फिल्मकारों को लगातार मेंटरिंग देने की आवश्यकता है।
स्थानीय भाषा और प्रतिभाओं को मिले प्राथमिकता
असीम सिन्हा ने कहा कि झारखंड की स्थानीय भाषाओं, कला, संस्कृति और प्रतिभाओं को फिल्म निर्माण में प्राथमिकता दी जाए तो यहां की कहानियां दुनिया तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के प्रयासों को और गति देने की जरूरत है, ताकि झारखंड में भी दक्षिण भारतीय राज्यों की तरह मजबूत फिल्म इंडस्ट्री विकसित हो सके।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों और फिल्म एडिटिंग के क्षेत्र में हुए तकनीकी बदलावों के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती और वह आज भी लगातार सीख रहे हैं।
असीम सिन्हा ने श्याम बेनेगल, अंशुल शर्मा, चंद्र प्रकाश द्विवेदी, पाकिस्तानी निर्देशक महरीन जब्बार, तिग्मांशु धूलिया, कल्पना लाजमी, केतन मेहता और कुंदन शाह जैसे फिल्मकारों के साथ काम करने के अनुभव भी साझा किए।
40 साल पुराना सपना अब होता दिख रहा साकार
असीम सिन्हा ने बताया कि पिछले करीब 40 वर्षों से उनकी इच्छा रही है कि झारखंड में एक बेहतर फिल्म इंस्टीट्यूट स्थापित हो। उन्होंने कहा कि अब यह सपना साकार होता दिखाई दे रहा है।
उन्होंने अपने फिल्मी सफर के बारे में बताते हुए कहा कि रांची में पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मुंबई का रुख किया। वहां उन्होंने फिल्म एडिटिंग के क्षेत्र में काम करते हुए सैकड़ों फिल्मों के निर्माण से जुड़ने का अनुभव हासिल किया।
वर्तमान में असीम सिन्हा 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की नॉन-फीचर फिल्म श्रेणी की जूरी के अध्यक्ष हैं।

100 से अधिक फिल्मों का किया संपादन
कार्यक्रम में विभाग के संयुक्त निदेशक आनंद ने असीम सिन्हा के फिल्मी सफर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने 100 से अधिक फिल्मों में संपादन का काम किया है। करीब तीन दशक तक फिल्म जगत में सक्रिय रहते हुए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। उनका अनुभव झारखंड में उभरते फिल्म उद्योग के लिए काफी महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक है।
इस अवसर पर विभाग के उपनिदेशक सैय्यद राशिद अख्तर ने असीम सिन्हा को शॉल और मोमेंटो देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में सहायक निदेशक अभय कुमार, जेब अख्तर, अनुज कुमार, महेश माझी सहित फिल्म और कला क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद रहे।
















