Why did India need to import sugar?

आप के काम की खबर.. भारत को चीनी आयात करने की जरूरत क्यों पड़ी? उत्पादन घटा, या  त्योहारी सीजन से बढ़ा दबाव

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नई दिल्ली: भारत दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और उपभोक्ता देशों में शामिल है। ऐसे में जब सरकार को करीब 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देनी पड़ी, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर देश को चीनी आयात करने की जरूरत क्यों पड़ी।

दरअसल, मामला देश में चीनी पूरी तरह खत्म होने का नहीं है। समस्या घरेलू उत्पादन में कमी, घटते स्टॉक, बढ़ती कीमतों और आने वाले त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की आशंका से जुड़ी है।

अनुमान से कम हुआ चीनी का उत्पादन

2025-26 सीजन में भारत का चीनी उत्पादन शुरुआती अनुमान की तुलना में कम रहने का अनुमान है। पहले उत्पादन करीब 343 लाख टन रहने की उम्मीद थी, लेकिन बाद के अनुमानों में इसे घटाकर करीब 306 लाख टन किया गया है।

उत्पादन में इस कमी का सीधा असर घरेलू बाजार में उपलब्ध चीनी के स्टॉक पर पड़ा है।

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गन्ने की पैदावार पर मौसम का असर

चीनी उत्पादन पूरी तरह गन्ने की उपलब्धता पर निर्भर करता है। कई इलाकों में मौसम और बारिश की परिस्थितियों ने गन्ने की पैदावार को प्रभावित किया है। इसका असर चीनी मिलों के उत्पादन पर पड़ा।

यानी समस्या सिर्फ चीनी की मांग बढ़ने की नहीं है, बल्कि इस साल गन्ने से बनने वाली चीनी की मात्रा भी अपेक्षा से कम रही है।

मांग बढ़ने से सरकार की चिंता बढ़ी

भारत में चीनी की घरेलू खपत काफी अधिक है। त्योहारों के मौसम में मिठाई, बेकरी, पेय पदार्थ और दूसरे खाद्य उत्पादों में चीनी की मांग बढ़ जाती है।

अगस्त से नवंबर तक देश में त्योहारों का सीजन रहता है। ऐसे में सरकार नहीं चाहती कि आने वाले महीनों में बाजार में चीनी की कमी का माहौल बने और कीमतें और बढ़ जाएं।

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चीनी की कीमतों में तेजी बनी बड़ी वजह

इस पूरे फैसले की सबसे बड़ी वजहों में से एक घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी है। कम उत्पादन और सीमित उपलब्धता के बीच कीमतों पर दबाव बढ़ा है।

ऐसे में सरकार का मानना है कि विदेश से अतिरिक्त चीनी आने पर बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

क्या भारत में चीनी की कमी हो गई है ?

हालांकि देश में चीनी का स्टॉक मौजूद है, लेकिन उपलब्ध स्टॉक और आगे की मांग के बीच संतुलन बिगड़ने की आशंका पैदा हुई है। सरकार का आयात का फैसला इसी संभावित दबाव को कम करने की कोशिश है।

दूसरे शब्दों में, भारत को आयात की जरूरत इसलिए नहीं पड़ी कि देश में चीनी बनना बंद हो गई है, बल्कि इसलिए कि इस साल उत्पादन कम है और घरेलू मांग को देखते हुए बाजार में पर्याप्त बफर स्टॉक बनाए रखना जरूरी हो गया है।

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एथेनॉल नीति को लेकर भी उठे सवाल

चीनी उत्पादन में कमी के बीच गन्ने से एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी को लेकर भी सवाल उठे हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने यह तर्क खारिज किया है कि मौजूदा चीनी कीमतों में तेजी की मुख्य वजह एथेनॉल के लिए चीनी का इस्तेमाल है।

सरकार का जोर उत्पादन में कमी, बाजार की स्थिति और आपूर्ति-मांग के अंतर जैसे कारणों पर है।

क्या इसका असर आम लोगों पर पड़ेगा?

सरकार का प्रयास यही है कि अतिरिक्त आयात से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़े और कीमतों पर नियंत्रण रहे। अगर आयात से आपूर्ति बढ़ती है, तो त्योहारों के दौरान कीमतों में तेज उछाल की संभावना कम हो सकती है।

हालांकि इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आयातित चीनी बाजार में कितनी जल्दी पहुंचती है और घरेलू उत्पादन व मांग की स्थिति आने वाले महीनों में कैसी रहती है।

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Drishti Now

Drishti Now

वरिष्ठ संवाददाता

झारखंड की राजनीति, प्रशासन और स्थानीय खबरों पर लंबे समय से रिपोर्टिंग कर रहे हैं।