Jharkhand Elephant Corridor : झारखंड में हाथियों के आतंक पर लगेगा लगाम: CM हेमंत सोरेन ने जारी किया ‘एलिफेंट कॉरिडोर मास्टर प्लान’
झारखंड में हाथियों के आतंक पर लगेगा लगाम: CM हेमंत सोरेन ने जारी किया ‘एलिफेंट कॉरिडोर मास्टर प्लान’

रांची | 14 फरवरी Jharkhand Elephant Corridor : झारखंड में हाथियों के हमले से होने वाली जनहानि और संपत्ति के नुकसान को रोकने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में राज्य के लिए एक महत्वाकांक्षी ‘एलिफेंट कॉरिडोर मास्टर प्लान’ को मंजूरी दी गई है, जिसमें तकनीक और पारंपरिक तरीकों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
10 साल का विजन: 31 मार्च तक तैयार होगा रोडमैप
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाधान पर काम कर रही है। इसके लिए एक 10-Year Vision Document तैयार किया जा रहा है, जिसका अंतिम ड्राफ्ट 31 मार्च 2026 तक सामने आ जाएगा। इसमें वनों के पुनरुद्धार और हाथियों के प्राकृतिक आवास को सुधारने के लिए 30 मुख्य एजेंडा शामिल किए गए हैं।
AI और थर्मल कैमरों से होगी हाथियों की निगरानी
मास्टर प्लान की सबसे बड़ी विशेषता अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग है:
* डिजिटल मैपिंग: राज्य के सभी पुराने और नए एलिफेंट कॉरिडोर की सटीक मैपिंग होगी।
* AI तकनीक: हाथियों की आवाजाही पर नज़र रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और थर्मल इमेजिंग कैमरों का जाल बिछाया जाएगा, जिससे ग्रामीणों को समय रहते अलर्ट मिल सके।
* सुरक्षित मार्ग: रेलवे ट्रैक और सड़कों के नीचे अंडरपास बनाए जाएंगे, जबकि सड़कों के किनारे लोहे की ऊंची दीवारें (Fencing) लगाई जाएंगी।
रेस्क्यू के लिए आएंगे 6 ‘कुमकी’ हाथी
जंगली हाथियों को बस्तियों से सुरक्षित वापस जंगल भेजने के लिए सरकार 6 प्रशिक्षित ‘कुमकी’ हाथी मंगवा रही है। ये हाथी रेस्क्यू ऑपरेशन में विशेषज्ञों की भूमिका निभाएंगे। साथ ही, रांची के पास 5-10 हेक्टेयर में एक आधुनिक एलिफेंट रेस्क्यू सेंटर भी बनाया जाएगा।
मुआवजा प्रक्रिया में बड़ा बदलाव: 12 दिन में मिलेगा पैसा
पीड़ित परिवारों को राहत देते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि हाथी के हमले में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों को 12 दिनों के भीतर मुआवजा राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। फसल और मकान के नुकसान के लिए भी मुआवजा नियमों को सरल बनाया गया है।
ग्रामीणों को मिलेगी ‘सुरक्षा किट’ और ट्रेनिंग
प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों को अब केवल विभाग के भरोसे नहीं रहना होगा। उन्हें सशक्त बनाने के लिए:
* सुरक्षा किट: सोलर सायरन, टॉर्च, डीजल और मशाल जैसी सामग्री दी जाएगी।
* ट्रेनिंग: ग्रामीणों को ‘रैपिड रिस्पांस टीम’ के साथ मिलकर काम करने के लिए विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
> “हमारा लक्ष्य इंसान और हाथी दोनों की जान बचाना है। यह मास्टर प्लान झारखंड के वनों और वन्यजीव प्रबंधन में एक मील का पत्थर साबित होगा।” > — मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन


















