साहिबगंज में गंगा का रौद्र रूप, हजारों परिवारों पर टूटा बाढ़ का कहर
गदाई दियारा के 14 टोलों में तबाही का मंजर, करीब 1100 घरों पर संकट; 3400 परिवारों की जिंदगी हुई बेहाल

साहिबगंज। साहिबगंज जिले में गंगा नदी इन दिनों प्रचंड उफान पर है। लगातार बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गंगा की तेज धार और बढ़ते पानी के कारण कई गांवों और टोलों में बाढ़ का पानी फैल गया है। कहीं घर पानी से घिर गए हैं, तो कहीं लोगों की पूरी गृहस्थी बाढ़ की चपेट में आ गई है।
राजमहल प्रखंड की गदाई दियारा पंचायत में बाढ़ का असर सबसे गंभीर नजर आ रहा है। पंचायत के करीब 14 टोले बाढ़ से प्रभावित हैं। यहां लगभग 1100 घरों पर संकट मंडरा रहा है, जबकि करीब 3400 परिवारों की जिंदगी बाढ़ के कारण बेहाल हो गई है।
चारों तरफ पानी, टापू में तब्दील हुई बस्तियां
गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही प्रभावित इलाकों की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। जिन इलाकों में कुछ दिन पहले तक लोगों की आवाजाही और खेतों में हरियाली दिखाई देती थी, वहां अब दूर-दूर तक पानी नजर आ रहा है।
कई बस्तियों को बाढ़ के पानी ने चारों ओर से घेर लिया है। आवाजाही के रास्ते प्रभावित होने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। कुछ जगहों पर घरों तक पानी पहुंच चुका है। ऐसे में लोगों को अपने परिवार, मवेशियों, अनाज और घरेलू सामान को सुरक्षित रखने की चिंता सता रही है।

बच्चों और बुजुर्गों को लेकर बढ़ी चिंता
बाढ़ के बीच सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है। लोगों को हर समय इस बात का डर बना हुआ है कि गंगा का जलस्तर और बढ़ा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
कई परिवारों के सामने सुरक्षित स्थान पर जाने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती खड़ी हो गई है। बाढ़ का पानी बढ़ने से लोगों की सामान्य जिंदगी लगभग थम गई है।
प्रशासन अलर्ट, राहत पहुंचाने की कोशिश
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन भी सतर्क है। प्रभावित इलाकों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों और राहत दलों की ओर से प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल लोगों की सबसे बड़ी चिंता गंगा के जलस्तर को लेकर है। यदि जलस्तर में और वृद्धि होती है तो प्रभावित टोलों में संकट और गहरा सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने की बड़ी चुनौती है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रभावित टोलों में राहत कार्य तेज किया जाए और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।


















