जमशेदपुर: निजी स्कूलों की ‘मनमानी फीस’ के खिलाफ आर-पार की लड़ाई, झारखंड शिक्षा उत्थान समिति ने शुरू किया बड़ा आंदोलन
नीरज तिवारी
जमशेदपुर: शहर के निजी स्कूलों द्वारा लगातार बढ़ाई जा रही फीस और कथित उगाही के खिलाफ अभिभावकों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया है। झारखंड शिक्षा उत्थान समिति ने इन स्कूलों की मनमानी के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है, जिसके तहत आज से ‘पोस्टकार्ड हस्ताक्षर अभियान’ और ‘भिक्षाटन कार्यक्रम’ की शुरुआत की गई।
आजसू नेता चंद्रगुप्ता सिंह ने दी आंदोलन को धार
आंदोलन के पहले दिन आजसू नेता चंद्रगुप्ता सिंह ने इस अभियान की औपचारिक शुरुआत की। उन्होंने निजी स्कूलों के प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा को व्यापार नहीं बनने दिया जाएगा।
2 लाख पोस्टकार्ड से गूंजेगी सरकार की चौखट
समिति के सदस्य क्रांति सिंह ने जानकारी दी कि यह विरोध प्रदर्शन अब केवल जमशेदपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरे राज्य में एक ‘जनजागरण अभियान’ का रूप दिया जाएगा।
हस्ताक्षर अभियान: समिति का लक्ष्य करीब 2 लाख पोस्टकार्ड पर अभिभावकों के हस्ताक्षर जुटाकर सरकार को यह बताना है कि आम आदमी फीस के बोझ तले दब चुका है।
अनोखा विरोध: ‘भिक्षाटन’ के माध्यम से समिति यह दर्शाना चाहती है कि निजी स्कूलों की फीस भरने के लिए अभिभावकों की स्थिति दयनीय हो गई है।
मुख्यमंत्री तक पहुंच: अभियान के अंत में, इन हस्ताक्षरित पोस्टकार्डों को पदयात्रा के जरिए सीधे मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा।
समिति की प्रमुख मांगें
झारखंड शिक्षा उत्थान समिति ने सरकार से तीन स्पष्ट मांगें की हैं:
1. फीस संरचना पर लगाम: निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर राज्य सरकार द्वारा सख्त नियंत्रण लगाया जाए।
2. पारदर्शिता: स्कूलों में फीस की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए ताकि अभिभावकों का शोषण न हो।
3. त्वरित राहत: सरकार अभिभावकों को आर्थिक राहत देने के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाए।
शिक्षा के अधिकार और अभिभावकों की आर्थिक स्थिति से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार क्या कदम उठाती है, यह देखना दिलचस्प होगा। अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।

















