झारखंड विधानसभा: JPSC-JSSC मुद्दे पर दूसरे दिन भी हंगामा, विधानसभा सोमवार 11 बजे तक के लिए स्थागीत ,इधर CBI जांच की मांग पर अड़ा विपक्ष

रांची: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन की पहली पाली विपक्ष के जोरदार हंगामे, तीखी नोकझोंक और सियासी आरोप-प्रत्यारोप के नाम रही। सदन के बाहर से लेकर भीतर तक भाजपा समेत विपक्षी दलों ने JPSC और JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया और सभी मामलों की उच्च न्यायालय की निगरानी में CBI जांच कराने की मांग दोहराई। इस दौरान स्पीकर ने पहली बार विधानसभा 12:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया ।दूसरी बार कार्रवाई महज कुछ मिनट तक चली और अनुपूरक बजट पास होने के बाद विधानसभा की कार्रवाई सोमवार 11:00 तक के लिए स्थगित कर दिया गया

कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा और अन्य विपक्षी दलों के विधायक अपनी सीटों से उठकर नारेबाजी करने लगे। कुछ ही देर में विपक्षी सदस्य वेल में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई।

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य की चयन आयोगों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि हाल के वर्षों में आयोजित लगभग सभी प्रमुख भर्ती परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। उन्होंने सहायक आचार्य भर्ती, झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा, उत्पाद सिपाही भर्ती, पीजीटी शिक्षक नियुक्ति तथा 11वीं, 12वीं, 13वीं और 14वीं JPSC परीक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

मरांडी ने कहा कि राज्य के हजारों अभ्यर्थी अपने भविष्य को लेकर सड़क पर आंदोलन कर रहे हैं और भारी बारिश के बावजूद न्याय की मांग पर डटे हुए हैं। उनका कहना था कि छात्रों का भरोसा बहाल करने के लिए सभी विवादित परीक्षाओं की जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में CBI से कराई जानी चाहिए।

विपक्ष के हंगामे पर संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सदन में प्रथम अनुपूरक बजट पेश किया जाना है, जो राज्य के विकास और वित्तीय प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि JPSC-JSSC के मुद्दे पर चर्चा के लिए सदन में पर्याप्त अवसर दिया जाएगा और विधिवत बहस के दौरान वे अपनी बात रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि लगातार व्यवधान उत्पन्न करना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है।

इस बीच, मंत्री सुदिव्य कुमार और कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने छात्र प्रतिनिधिमंडल में पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार के शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई। विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री सुदिव्य कुमार ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन के पीछे भाजपा और कोचिंग माफिया की भूमिका है। उन्होंने कहा कि सरकार आंदोलन को राजनीतिक रंग नहीं लेने देगी और भाजपा को “पर्दे के पीछे की राजनीति” बंद करनी चाहिए।

मंत्री ने आंदोलनरत छात्रों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने आंदोलन की निष्पक्षता बनाए रखें और राजनीतिक दलों से दूरी रखें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार छात्रों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उनकी समस्याओं की अनदेखी नहीं की जाएगी।

दूसरे दिन भी JPSC-JSSC का मुद्दा विधानसभा की कार्यवाही पर पूरी तरह हावी रहा। विपक्ष अपनी जांच की मांग पर अड़ा रहा, जबकि सरकार ने चर्चा और समाधान का भरोसा दोहराया। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहने के संकेत दे रहा है।




















