धनबाद-बोकारो मुख्य मार्ग पर बड़ा हादसा टला: बीच सड़क पर हुआ जोरदार धंसाव, यातायात ठप
धनबाद-बोकारो मुख्य मार्ग पर बड़ा हादसा टला: बीच सड़क पर हुआ जोरदार धंसाव, यातायात ठप
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धनबाद: कोयलांचल में भू-धंसाव का खतरा थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला धनबाद-बोकारो मुख्य मार्ग का है, जहाँ केंदुआडीह थाना के ठीक सामने अचानक सड़क बीचों-बीच करीब दो फीट तक धंस गई। इस घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
तेज आवाज के साथ फटी जमीन
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना के वक्त अचानक जमीन के अंदर से एक डरावनी और तेज आवाज आई। देखते ही देखते मुख्य मार्ग का एक बड़ा हिस्सा लगभग दो फीट नीचे समा गया। धंसाव इतना जबरदस्त था कि सड़क के आसपास के बड़े हिस्से में लंबी और गहरी दरारें उभर आईं। राहत की बात यह रही कि जिस समय यह धंसाव हुआ, उस वक्त कोई भारी वाहन उस पॉइंट से नहीं गुजर रहा था, अन्यथा बड़ी जान-माल की हानि हो सकती थी।
पुलिस ने मोर्चा संभाला, मार्ग पूरी तरह सील
घटना की गंभीरता को देखते हुए केंदुआडीह थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। सुरक्षा के लिहाज से प्रभावित स्थल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई है। पुलिस ने न केवल वाहनों, बल्कि पैदल चलने वालों के लिए भी उस क्षेत्र को प्रतिबंधित कर दिया है।
यातायात में बदलाव (Traffic Diverted)
सड़क धंसने के कारण इस व्यस्त मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
वैकल्पिक मार्ग: बोकारो की ओर जाने वाले सभी छोटे-बड़े वाहनों को वैकल्पिक रास्तों पर डायवर्ट कर दिया गया है।
चेतावनी: स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे दरार वाले हिस्से के पास न जाएं, क्योंकि जमीन के अंदर अभी भी हलचल की संभावना बनी हुई है।
खतरे के साये में राहगीर
इस घटना ने एक बार फिर धनबाद के झरिया और आसपास के क्षेत्रों में भूमिगत आग और कोयला खदानों के कारण होने वाले धंसाव के खतरे को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी रोष और डर है कि व्यस्त मुख्य मार्ग भी अब सुरक्षित नहीं रह गए हैं। फिलहाल, संबंधित विभाग को इसकी सूचना दे दी गई है ताकि सड़क की मरम्मत और सुरक्षा जांच की जा सके।
धनबाद में आखिकार क्यों हो रहा है भू-धसान ?
धनबाद (विशेषकर झरिया और केंदुआडीह जैसे क्षेत्र) में भू-धंसाव (Land Subsidence) की समस्या एक गंभीर मानवीय और पर्यावरणीय संकट बनी हुई है। इसके पीछे कई ऐतिहासिक, तकनीकी और भौगोलिक कारण माने जाते हैं:
1. भूमिगत आग (Underground Mine Fire)
धनबाद के झरिया कोलफील्ड्स के नीचे दशकों से कोयले की परतों में आग लगी हुई है।
असर: यह आग जमीन के नीचे के कोयले को जलाकर राख कर देती है, जिससे ऊपरी सतह को सहारा देने वाली जगह खाली हो जाती है। जब आधार खोखला होता है, तो भारी दबाव या बारिश के कारण जमीन अचानक धंस जाती है।
2. पुरानी और असुरक्षित खनन तकनीक (Scientific Mining का अभाव)
बीते दशकों (विशेषकर निजी हाथों में खनन के दौरान) में ‘रैट-होल’ या अनियोजित तरीके से कोयला निकाला गया।
असर: खदानों से कोयला निकालने के बाद नियमानुसार उन खाली जगहों (Galleries) को रेत या अन्य सामग्री से भरा जाना चाहिए था (Sand Stowing), जो कई जगहों पर नहीं किया गया। ये खाली गैलरी आज धंसाव का सबसे बड़ा कारण हैं।
3. अवैध खनन (Illegal Mining)
अवैध रूप से कोयला निकालने वाले लोग सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए जमीन के काफी करीब तक खुदाई कर देते हैं।
असर: वे पिलर्स (जो जमीन का भार थामे रखते हैं) को भी काट देते हैं, जिससे पूरी संरचना कमजोर हो जाती है और ऊपर की सड़क या बस्तियां जमीन में समा जाती हैं।
4. भारी बारिश और जलभराव
बारिश का पानी जब पुरानी खदानों की दरारों में घुसता है, तो वह मिट्टी की पकड़ ढीली कर देता है।
असर: पानी के दबाव और मिट्टी के कटाव के कारण ऊपरी परत का संतुलन बिगड़ जाता है,
5. भारी वाहनों का दबाव
धनबाद-बोकारो मार्ग जैसे व्यस्त रास्तों पर भारी मालवाहक ट्रकों का निरंतर दबाव रहता है।
असर: अगर जमीन के नीचे पहले से ही खाली जगह (Void) है, तो ऊपर से पड़ने वाला यह भारी दबाव धंसाव की प्रक्रिया को तेज कर देता है।
वर्तमान स्थिति और समाधान
प्रशासन और BCCL (Bharat Coking Coal Limited) द्वारा धंसाव प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को हटाने (Rehabilitation) और आग बुझाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन समस्या की व्यापकता इतनी अधिक है कि यह अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।















