Mental health and suicide prevention in Jharkhand will receive a new impetus, with CHW training program launched at CIP.

झारखंड में मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम को मिलेगी नई ताकत, सीआईपी में सीएचडब्ल्यू प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

Mental health and suicide prevention in Jharkhand will receive a new impetus, with CHW training program launched at CIP.
Mental health and suicide prevention in Jharkhand will receive a new impetus, with CHW training program launched at CIP.

रांची: केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (सीआईपी), कांके में ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। मनोरोग सामाजिक कार्य विभाग द्वारा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) के वित्तीय सहयोग से संचालित परियोजना “झारखंड में ग्रामीण (जनजातीय) सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (सीएचडब्ल्यू) के लिए मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या जोखिम प्रबंधन प्रशिक्षण की प्रभावशीलता का मूल्यांकन” के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि सामुदायिक स्तर पर प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान, समय पर हस्तक्षेप और आत्महत्या रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने इस पहल को ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों तक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक प्रभावी कदम बताया।

कार्यक्रम में सिविल सर्जन रांची डॉ. प्रभात कुमार, राज्य आयुष सलाहकार समिति के संयोजक डॉ. राजीव कुमार, रिनपास के पूर्व निदेशक प्रो. अमूल रंजन सिंह, एनएचएम के नोडल पदाधिकारी डॉ. लाल मांझी तथा राज्य सलाहकार डॉ. संतना विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सीआईपी के प्रभारी निदेशक डॉ. ए. के. सुधांशु ने की। इस अवसर पर प्रशासनिक पदाधिकारी डॉ. सुनील कुमार सूर्यवंशी, मनोरोग सामाजिक कार्य विभाग के प्रभारी एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव तथा वरिष्ठ मनोरोग सामाजिक कल्याण पदाधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह भी मौजूद थे।

कार्यक्रम के दौरान एम.फिल. मनोरोग सामाजिक कार्य के विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और आत्महत्या रोकथाम विषय पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया, जिसने प्रतिभागियों और अतिथियों को प्रभावित किया।

परियोजना के प्रथम चरण में रांची जिले के 100 सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या जोखिम प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं, पूरे प्रोजेक्ट के तहत झारखंड के पांच जिलों में कुल 500 सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे समुदाय स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने और आत्महत्या रोकथाम के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है।

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