Municipal Corporation Special Meeting: 'Censure Motion

नगर निगम की विशेष बैठक: ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को रोकने पर विपक्ष के विरुद्ध ‘निंदा प्रस्ताव’ पारित

 नगर निगम की विशेष बैठक: ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को रोकने पर विपक्ष के विरुद्ध ‘निंदा प्रस्ताव’ पारित

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Municipal Corporation Special Meeting: 'Censure Motion

रांची  | 30 अप्रैल 2026

 नगर निगम के हॉल में महापौर  रोशनी खलखो की अध्यक्षता में एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में प्रस्तावित आवश्यक संशोधनों को संसद में पारित न होने देने के विरुद्ध सामूहिक रूप से अपनी नाराजगी व्यक्त करना और विपक्ष के रवैये की भर्त्सना करना था।

विपक्ष का रवैया दुर्भाग्यपूर्ण: महापौर

बैठक को संबोधित करते हुए महापौर  रोशनी खलखो ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की करोड़ों महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करने वाला था। उन्होंने इसे लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय बताते हुए कहा:

> “यह बिल संसद और विधानसभाओं में हमारी माताओं, बहनों और बेटियों को 33% आरक्षण देकर उन्हें निर्णय लेने वाली प्रक्रियाओं में शामिल करने का ऐतिहासिक कदम था। किंतु, विपक्षी दलों ने अपने संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों को देश की आधी आबादी के अधिकारों से ऊपर रखा। यह सीधे तौर पर समावेशी भारत के विकास पर कुठाराघात है।”*

सर्वसम्मति से ‘निंदा प्रस्ताव’ पारित

बैठक में उपस्थित उप-महापौर, पार्षदगण और अन्य जनप्रतिनिधियों ने विपक्ष के इस कृत्य को “महिला विरोधी मानसिकता” का परिचायक बताया। सदन में यह बात प्रमुखता से रखी गई कि संशोधनों को जानबूझकर अधर में लटकाया गया ताकि संवैधानिक अधिकार मिलने में देरी हो सके।

बैठक के प्रमुख बिंदु:

 कुत्सित प्रयास: विपक्ष पर संसद में एकजुट होकर महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों को रोकने का आरोप लगाया गया।
ऐतिहासिक चूक: 33% आरक्षण को अधर में लटकाने को विपक्षी राजनीति की बड़ी विफलता करार दिया गया।
सामूहिक निंदा:  महापौर एवं समस्त पार्षदों ने एक स्वर में विपक्ष के विरुद्ध  निंदा प्रस्ताव पारित किया।

महिलाओं की आवाज बुलंद करेगा सदन

बैठक के अंत में यह संकल्प लिया गया कि नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस विषय को जनता के बीच ले जाएंगे। महापौर ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के अधिकारों के लिए यह संघर्ष केवल सदन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़क से लेकर संसद तक इस जनविरोधी रवैये का विरोध किया जाएगा।

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