पाकुड़ में मानवता शर्मसार: प्रेम प्रसंग के शक में महिला और युवक को अर्धनग्न कर घुमाया, पंचायत की भूमिका संदिग्ध

पाकुड़ (अमड़ापाड़ा): झारखंड के पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा थाना क्षेत्र के बूढ़ीडूबा गाँव से एक अत्यंत विचलित करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ प्रेम प्रसंग के शक में एक विवाहित महिला और एक युवक को ‘तालिबानी सजा’ दी गई। आरोप है कि पति और ग्रामीणों ने मिलकर न केवल दोनों को बंधक बनाया, बल्कि उन्हें अर्धनग्न कर पूरे गाँव में घुमाया।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना 26 जून को घटित हुई। पीड़िता का ससुराल और मायका दोनों अमड़ापाड़ा थाना क्षेत्र में ही हैं, जबकि युवक साहेबगंज जिले के बोरियो प्रखंड का निवासी बताया जा रहा है। पति और उसके साथियों ने संदेह के आधार पर दोनों को पकड़ लिया और उन्हें प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने कानून को अपने हाथ में लेते हुए दोनों के कपड़े फाड़ दिए और उन्हें अर्धनग्न अवस्था में पूरे गाँव में घुमाया। यह अमानवीय कृत्य करीब दो दिनों तक चलता रहा, जब तक कि पुलिस ने हस्तक्षेप नहीं किया।
मामले की जानकारी मिलते ही अमड़ापाड़ा थाना प्रभारी अनूप रोशन भंगरा, सब-इंस्पेक्टर चंदन कुमार और अन्य पुलिस बल ने घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ितों को ग्रामीणों की कैद से मुक्त कराया।
प्राथमिकी दर्ज: पीड़िता के बयान के आधार पर अमड़ापाड़ा थाना कांड संख्या 49/2026 के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
आरोपी: पुलिस ने 7 नामजद और लगभग 30-40 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
मेडिकल जांच: पीड़ितों को सुरक्षा के साथ मेडिकल जांच के लिए भेजा गया है। एसडीपीओ विजय कुमार मामले की गहन निगरानी कर रहे हैं और दोषियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह से पारदर्शी होगी और जो भी व्यक्ति इस सुनियोजित कांड में शामिल पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
प्रधान की संदिग्ध भूमिका पर उठे सवाल
इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आरोप है कि घटना ग्राम प्रधान की जानकारी में थी, लेकिन उन्होंने पुलिस को सूचना देने के बजाय चुप्पी साधे रखी। इस लापरवाही के चलते स्थानीय प्रशासन ने प्रधान से स्पष्टीकरण मांगा है।
पंचायत मुखिया साहेबजान टुडू ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा, *”संविधान किसी को भी कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं देता है। आदिवासी संस्कृति में नारी का सम्मान सर्वोपरि है, और इस प्रकार की घटना समाज के लिए कलंक है।”
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