पूजा सिंघल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, मनी लॉन्ड्रिंग केस में ट्रायल रहेगा जारी
रांची। झारखंड कैडर की आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उनके खिलाफ निचली अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान के आदेश को इस स्तर पर रद्द करने से इनकार कर दिया। ऐसे में उनके खिलाफ धनशोधन मामले की न्यायिक कार्यवाही जारी रहेगी। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। पीठ में न्यायमूर्ति जायमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू पेश हुए, जबकि पूजा सिंघल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने पक्ष रखा।

मुकदमा चलाने की मंजूरी का मुद्दा
सुनवाई के दौरान पूजा सिंघल की ओर से दलील दी गई कि तत्कालीन सरकारी अधिकारी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सीआरपीसी की धारा 197 के तहत आवश्यक पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। उनकी ओर से यह भी कहा गया कि कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कृत्य उस समय उनकी आधिकारिक जिम्मेदारियों से संबंधित थे। ईडी की ओर से इस आपत्ति का विरोध किया गया। एजेंसी ने मुकदमे के लिए मंजूरी से जुड़े प्रावधानों का हवाला दिया। अदालत के समक्ष यह सवाल भी आया कि कथित अपराध के समय पूजा सिंघल अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन कर रही थीं या नहीं।

19 करोड़ रुपये से अधिक नकदी बरामदगी का उल्लेख
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जायमाल्य बागची ने मामले में 19 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बरामद होने का उल्लेख किया। इससे पहले मई 2022 में ईडी की कार्रवाई के दौरान पूजा सिंघल से जुड़े परिसरों और उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट के ठिकाने से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की बात सामने आई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल संज्ञान आदेश को रद्द करने से इनकार करते हुए मंजूरी के कानूनी सवाल को आगे की कार्यवाही के लिए खुला रखा है। यानी इस चरण पर अदालत ने यह अंतिम फैसला नहीं दिया है कि मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी की आवश्यकता थी या नहीं।

2022 में हुई थी गिरफ्तारी
मनरेगा में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले की जांच के दौरान ईडी ने 11 मई 2022 को पूजा सिंघल को गिरफ्तार किया था। जांच में खूंटी जिले में मनरेगा से जुड़े करीब 18 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से संबंधित धनशोधन के आरोपों की जांच की गई। पूजा सिंघल लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रहीं। बाद में उन्हें जमानत मिली। जमानत का अर्थ मामले में आरोपों से बरी होना नहीं है और उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।

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