Prem Prakash

प्रेम प्रकाश ( PREM PRAKASH )बैंक कर्मचारी से सत्ता के गलियारों तक

प्रेम प्रकाश ( PREM PRAKASH ) सत्ता के गलियारों में किसी पहचान के मोहताज नहीं थे लेकिन आज झारखण्ड में हर किसी के जुबान पर प्रेम प्रकाश का नाम है हर कोई उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहता है हम आपको प्रेम प्रकाश  की कहानी से रूबरू कृते है की कैसे  बैंक कर्मचारी से सत्ता की हेंक तक पंहुचा प्रेम प्रकाश   मूल रूप से बिहार के सासाराम के फजलगंज के प्रेम प्रकाश को पिता प्रमोद कुमार सिन्हा के निधन के बाद अनुकंपा पर बैंक में नौकरी मिली थी। प्रेम की पोस्टिंग एसबीआई राजभवन ब्रांच पटना में हुई।वर्ष 2002 में बैंक ने उस पर 26.5 लाख रुपए गबन करने का सचिवालय थाने में मामला दर्ज कराया। बाद में यह मामला सीबीआई को गया। सीबीआई ने कांड संख्या आरसी 8ए/2005 दर्ज करते हुए जांच शुरू की और चार्जशीट दायर कर दी। प्रेम प्रकाश ने वर्ष 2014 में पटना हाईकोर्ट में क्वैशिंग पिटीशन दाखिल की, जिसे पटना हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया।

 

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सूत्रों का कहना है कि बैंक में नौकरी करते हुए उसका नेताओं, अफसरों और कारोबारियों से संपर्क बना और वह ब्लैक मनी को व्हाइट करने लगा। इसी दौरान बिहार के एक कद्दावर नेता का पैसा डूबने के बाद वह भागकर झारखंड आ गया। यहां छोटा-मोटा काम शुरू किया। आंगनबाड़ी केंद्र में अंडों की सप्लाई की। नेताओं और अफसरों के बीच पैठ बढ़ाने लगा।अफसरों को टूर कराना, उनके घर में राशन और महंगे गिफ्ट पहुंचाने की कला से वह हर फन में माहिर हो गया। सूत्रों का कहना है कि झारखंड आने के बाद एक शीर्ष महिला अधिकारी का आशीर्वाद मिला। उस अधिकारी ने ही अन्य अधिकारियों से मिलवाया और काम देने को कहा, ताकि उसकी स्थिति सुधर सके। बस यहीं से प्रेम की किस्मत पलटी और देखते ही देखते वह नेताओं का चहेता और ब्यूरोक्रेसी की हर दर्द की दवा बन गया।

 

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इसी बीच प्रेम का कोलकाता के अग्रवाल बंधु से संपर्क बना, जिसने उसे अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का ठेका दे दिया। प्रेम ट्रांसफर-पोस्टिंग के बदले अफसरों से सौदा तय करता था। मोटी रकम वसूलता था और सूची अग्रवाल बंधु को भेज देता था। सूत्रों के मुताबिक कौन किस जिले का डीसी-एसपी बनेगा, कौन किस विभाग का सचिव, यह प्रेम प्रकाश की लिस्ट से ही तय होता था। और नतीजा यह हुआ कि प्रेम के दरबार में अफसरों की हाजिरी लगने के साथ पैसों की बरसात होने लगी।

 

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सूत्रों के मुताबिक कोई भी विभाग हो, प्रेम का काम रुकता नहीं था। बाहर से आने वाले कॉन्ट्रैक्टर अपना काम कराने के लिए प्रेम से संपर्क साधता था। वह टेंडर मैनेज करने के लिए मोटी रकम वसूलता था। इसी तरह रांची में जमीन पर कब्जा दिलाने में भी उसका सिक्का चलता था। किसी जमीन का कागज हो या न हो, उसकी रजिस्ट्री नहीं रुकती थी।

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ईडी ने गुरुवार को पांच जिलों के जिला खनन पदाधिकारियों (डीएमओ) से पूछताछ की। इनमें चाईबासा डीएमओ निशांत अभिषेक, सरायकेला-खरसावां के सन्नी कुमार, हजारीबाग के अनिल कुमार, रामगढ़ के नीतेश कुमार गुप्ता और चतरा के डीएमओ गोपाल कुमार दास शामिल हैं। इनसे पूछा गया कि कितने दिन से जिले में तैनात है।

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अवैध खनन के खिलाफ क्या कार्रवाई की। कितने मामले दर्ज किए। अवैध खनन व परिवहन की काली कमाई का हिस्सा कहां-कहां पहुंचाया। लेकिन कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। सूत्रों के मुताबिक ईडी अब कुछ जिलों के परिवहन अधिकारियों से भी पूछताछ कर सकती है। क्योंकि ईडी को अवैध ट्रांसपोर्टिंग करने वाली कई गाड़ियों के नंबर मिले हैं।

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