जाति व्यवस्था खत्म हो तो आरक्षण छोड़ने को तैयार: रामदास अठावले, झारखंड में छात्र आंदोलन पर भी बोले
रांची: आरक्षण को लेकर देश में जारी बहस और आंदोलन के बीच केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर देश से जाति व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो जाती है, तो आरक्षण खत्म करने पर विचार किया जा सकता है। उनका कहना है कि जब तक समाज में जाति के आधार पर भेदभाव और असमानता मौजूद है, तब तक आरक्षण की जरूरत बनी रहेगी।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!झारखंड दौरे के दौरान रांची के मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में अठावले ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण संविधान में व्यवस्था के तौर पर मौजूद है। उन्होंने कहा कि सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को बराबरी का अवसर देने के लिए यह व्यवस्था जरूरी है।

SC-ST और OBC की आबादी का दिया आंकड़ा
अठावले ने 2011 की जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में SC और ST की आबादी करीब 25 प्रतिशत है, जबकि OBC की हिस्सेदारी लगभग 52 प्रतिशत बताई जाती है। उनके मुताबिक इन तीनों वर्गों की आबादी देश की बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है, जबकि आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था इसके मुकाबले कम है।
उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों के लिए दिए गए 10 प्रतिशत EWS आरक्षण का भी जिक्र किया। अठावले ने कहा कि इसमें किसी एक धर्म के लोगों को नहीं, बल्कि पात्र आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को लाभ मिलता है।
उनका तर्क था कि आरक्षण हटाने की मांग के साथ-साथ जाति आधारित भेदभाव को खत्म करने की दिशा में भी गंभीर पहल होनी चाहिए।
सरकारी उपक्रमों में आरक्षण बचाने पर जोर
अठावले ने सरकारी संस्थानों में आरक्षण व्यवस्था को बनाए रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि सरकारी कंपनियों में सरकार की पर्याप्त हिस्सेदारी रहनी चाहिए, क्योंकि बड़े पैमाने पर निजीकरण होने पर आरक्षण के प्रावधान को लेकर व्यावहारिक दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि SC वर्ग के लोगों को आज भी कई स्तरों पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आरक्षण को समाप्त करने के बजाय सामाजिक बराबरी की दिशा में काम करने की जरूरत है।
जातिगत जनगणना पर राहुल गांधी को घेरा
केंद्रीय मंत्री ने प्रस्तावित जाति आधारित जनगणना को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जातिगत आंकड़े जुटाने का फैसला अब सरकार ने किया है, लेकिन इसका राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
अठावले ने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस लंबे समय से जातिगत जनगणना की मांग को लेकर गंभीर थी, तो 2011 में तत्कालीन केंद्र सरकार के समय इसे व्यापक रूप से क्यों नहीं कराया गया।
उनके मुताबिक नई जनगणना से SC, ST, OBC और सामान्य वर्ग समेत विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक समूहों की वास्तविक स्थिति सामने आने में मदद मिलेगी।
हेमंत सरकार पर भी साधा निशाना
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार को लेकर भी अठावले ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन में शिबू सोरेन की अहम भूमिका रही है, लेकिन वर्तमान सरकार में दलित और आदिवासी समुदायों को जिस स्तर का न्याय मिलना चाहिए, वह उन्हें नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने राज्य सरकार से युवाओं के लिए रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा करने और प्रदेश में नए उद्योग स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम करने की अपील की।
छात्र आंदोलन को बताया जायज
झारखंड में छात्र आंदोलनों और परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद पर भी केंद्रीय मंत्री ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि छात्रों की शिकायतों पर सरकार को शुरुआत में ही उनसे बातचीत करनी चाहिए थी। आंदोलन के दौरान बल प्रयोग किए जाने को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाया।
अठावले ने कहा कि जिन परीक्षाओं में अनियमितता या पारदर्शिता की कमी के आरोप हैं, उनके संबंध में सरकार ने कार्रवाई की है। लेकिन वर्षों से नौकरी कर रहे लोगों के हितों को भी ध्यान में रखना होगा। उनका कहना था कि नई नीति बनाकर अधिक युवाओं को रोजगार देने का रास्ता तैयार किया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने अठावले के बयान पर किया पलटवार
अठावले के झारखंड सरकार पर लगाए गए आरोपों के बाद कांग्रेस ने भी पलटवार किया है। प्रदेश कांग्रेस की प्रवक्ता सोनाल शांति ने कहा कि केंद्रीय मंत्री को झारखंड सरकार पर सवाल उठाने से पहले केंद्र और भाजपा शासित राज्यों में छात्रों से जुड़े आंदोलनों पर जवाब देना चाहिए।
कांग्रेस ने सवाल किया कि केंद्रीय मंत्री के तौर पर अठावले ने झारखंड के विकास के लिए अब तक क्या पहल की है। पार्टी ने उनसे राज्य में रोजगार, उद्योग और विकास को लेकर केंद्र सरकार के योगदान का हिसाब भी मांगा।
दूसरे राज्यों में छात्रों पर कार्रवाई का उठाया मुद्दा
सोनाल शांति ने छात्र आंदोलनों पर कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि दिल्ली के जंतर-मंतर, बिहार के सीवान और पटना समेत दूसरे स्थानों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कार्रवाई क्यों हुई।
उन्होंने उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई का भी मुद्दा उठाया। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि इन सवालों का जवाब देने के बाद ही केंद्रीय मंत्री को झारखंड सरकार के खिलाफ टिप्पणी करनी चाहिए।

















