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33 फीसदी वन आवरण वाला सिमडेगा, फिर भी जैव विविधता के संरक्षण पर मंडरा रहा खतरा

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सिमडेगा: घने जंगल, पहाड़ियां, नदियां और समृद्ध प्राकृतिक जैव विविधता सिमडेगा जिले की विशिष्ट पहचान हैं। आदिवासी बहुल इस जिले में जंगल, जल और जमीन केवल प्राकृतिक संपदा नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन, कृषि और आजीविका के प्रमुख आधार भी हैं। भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार जिले के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के 33.03 प्रतिशत हिस्से पर वन आवरण है। शंख, दक्षिणी कोयल, देव और गिरवा जैसी नदियां जिले की प्राकृतिक समृद्धि को और बढ़ाती हैं। हालांकि, बदलते हालात में इस जैव विविधता का संरक्षण एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

वनों की सुरक्षा के सामने वनाग्नि भी गंभीर समस्या है। वन सर्वेक्षण के सैटेलाइट आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022-23 में सिमडेगा में वनाग्नि के 531 डिटेक्शन दर्ज किए गए थे। वर्ष 2023-24 में इनकी संख्या घटकर 27 रह गई। वहीं, वन विभाग के अलग रिकॉर्ड में वर्ष 2024 के दौरान आग लगने की 25 घटनाएं दर्ज हैं। ये आंकड़े जंगलों को आग से बचाने के लिए निरंतर निगरानी और प्रभावी प्रबंधन की आवश्यकता को दर्शाते हैं।

33 फीसदी वन आवरण वाला सिमडेगा, फिर भी जैव विविधता के संरक्षण पर मंडरा रहा खतरा

इसके अलावा जंगलों की अवैध कटाई, वन भूमि पर अतिक्रमण, नदियों से अवैध बालू उत्खनन और पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण में कमी भी चिंता का विषय है। इन गतिविधियों का असर केवल वन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, मिट्टी की गुणवत्ता, जलस्तर और पर्यावरण संतुलन पर भी पड़ता है।

जैव विविधता के संरक्षण के लिए केवल पौधरोपण अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है। लगाए गए पौधों की उत्तरजीविता सुनिश्चित करना, पुराने प्राकृतिक जंगलों को बचाना, वन्यजीवों के आवास सुरक्षित रखना और जलस्रोतों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। इसके लिए वन विभाग के साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी और नियमित निगरानी की आवश्यकता है।

  • 33 फीसदी वन आवरण वाला सिमडेगा, फिर भी जैव विविधता के संरक्षण पर मंडरा रहा खतरा

सिमडेगा में वन संपदा की वास्तविक स्थिति और उसके संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का आकलन करने के लिए जिला वन प्रमंडल को पिछले पांच वर्षों के आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए। इनमें वर्षवार अवैध पेड़ कटाई, वनाग्नि की घटनाएं, पौधरोपण का लक्ष्य और उपलब्धि, लगाए गए पौधों की उत्तरजीविता तथा वन भूमि पर अतिक्रमण की स्थिति शामिल होनी चाहिए।

33 प्रतिशत से अधिक वन आवरण वाले सिमडेगा में आखिर प्राकृतिक संपदा कितनी सुरक्षित है? पौधरोपण पर खर्च होने वाली राशि के मुकाबले धरातल पर कितने पौधे जीवित हैं? जंगलों की कटाई और अतिक्रमण रोकने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं? इन सवालों का जवाब सार्वजनिक होना जरूरी है। क्योंकि जंगल, जल और जमीन की इस धरोहर को बचाना केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा सवाल है।

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शंभू कुमार सिंह

शंभू कुमार सिंह

रिपोर्टर

शंभू कुमार सिंह सिमडेगा के रहने वाले हैं ये 1995 से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत है दैनिक जागरण जिला प्रभारी, भास्कर दैनिक का जिला प्रभारी, सहित की भी चैनल के साथ में अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में लगातार सक्रिय रहे है । समाचार संकलन विशेष लेख फीचर व अन्य क्षेत्रों में भी विशेष पकड़।