Star of Indian-origin leaders shines again in Britain's new government; Kanishka Narayan becomes AI Minister, Lisa Nandy gets a major responsibility.

ब्रिटेन की नई सरकार में फिर चमका भारतवंशियों का सितारा, कनिष्क नारायण बने AI मंत्री, लीज़ा नंदी को मिली बड़ी जिम्मेदारी

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Star of Indian-origin leaders shines again in Britain's new government; Kanishka Narayan becomes AI Minister, Lisa Nandy gets a major responsibility.
Star of Indian-origin leaders shines again in Britain’s new government; Kanishka Narayan becomes AI Minister, Lisa Nandy gets a major responsibility.

नवीन कुमार

लंदन : ब्रिटेन की राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं का प्रभाव लगातार मजबूत होता जा रहा है। भारतीय मूल के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के बाद अब प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम की नई सरकार में भी भारतीय मूल के दो नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। बिहार में जन्मे कनिष्क नारायण को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मंत्री बनाया गया है, जबकि लीज़ा नंदी को संस्कृति, मीडिया और खेल मंत्रालय की कमान सौंपी गई है।

कनिष्क नारायण का जन्म बिहार के मुजफ्फरपुर में हुआ था। बचपन में उनका परिवार ब्रिटेन चला गया। वे वेल्स से चुने जाने वाले पहले जातीय अल्पसंख्यक सांसद हैं और अब ब्रिटेन की AI नीति एवं डिजिटल नवाचार से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों का नेतृत्व करेंगे। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने AI मंत्री के पद को पहली बार कैबिनेट स्तर पर महत्व दिया है, जिससे इस क्षेत्र की बढ़ती रणनीतिक अहमियत का संकेत मिलता है।

वहीं लीज़ा नंदी, जिनके पिता दीपक नंदी भारतीय मूल के शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता रहे हैं, ब्रिटेन की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। उन्हें संस्कृति, मीडिया और खेल मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। यह मंत्रालय ब्रिटेन की सांस्कृतिक नीतियों, रचनात्मक उद्योगों और मीडिया क्षेत्र के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भारतीय मूल के नेताओं पर बढ़ा भरोसा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियुक्तियां दर्शाती हैं कि भारतीय मूल का समुदाय अब ब्रिटेन की राजनीति की मुख्यधारा में स्थापित हो चुका है। एक समय प्रवासी समुदाय के रूप में पहचाने जाने वाले भारतीय मूल के लोग अब देश की तकनीकी, आर्थिक और सांस्कृतिक नीतियों को आकार देने वाले निर्णयकारी पदों तक पहुंच चुके हैं।

भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूती

दुनिया के विभिन्न देशों में भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती मौजूदगी भारत की वैश्विक सॉफ्ट पावर का भी प्रतीक मानी जा रही है। शिक्षा, तकनीक, उद्यमिता और नेतृत्व क्षमता के बल पर भारतीय मूल के लोगों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है।

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भारत-ब्रिटेन संबंधों को मिल सकता है लाभ

हालांकि ब्रिटिश मंत्री अपने देश के हितों के अनुरूप कार्य करते हैं, फिर भी भारतीय संस्कृति और समाज से उनका जुड़ाव दोनों देशों के बीच संवाद को और सहज बना सकता है। व्यापार, शिक्षा, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में इससे सकारात्मक माहौल बनने की संभावना है।

युवाओं के लिए प्रेरणा

कनिष्क नारायण और लीज़ा नंदी की सफलता दुनिया भर में बसे भारतीय मूल के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी उपलब्धियां यह संदेश देती हैं कि प्रतिभा, शिक्षा और नेतृत्व क्षमता के बल पर किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सर्वोच्च जिम्मेदारियां हासिल की जा सकती हैं।

ऋषि सुनक के प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद यह माना जा रहा था कि ब्रिटेन की सत्ता में भारतीय मूल के नेताओं का प्रभाव कम हो सकता है। लेकिन नई कैबिनेट में कनिष्क नारायण और लीज़ा नंदी की अहम भूमिका ने साफ कर दिया है कि भारतवंशियों की मौजूदगी अब ब्रिटेन की राजनीति में स्थायी और प्रभावशाली ताकत बन चुकी है।

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