संभावित पुलिस पिकेट निर्माण का ग्रामीणों ने जताया विरोध.
गिरीडीह, दिनेश.
गिरीडीह : मधुबन थाना क्षेत्र अंतर्गत टेसाफूली गांव में मांझी हडाम के नेतृत्व में टैसाफूली स्थित फुटबॉल मैदान में टेसाफूली और आसपास के गांव के ग्रामीणों द्वारा एक ग्राम सभा की गई जिसमें दर्जनों महिला-पुरुषो की हरवे हथियार के साथ उपस्थिति रही. आहूत इस बैठक में लोगों द्वारा संभावित पुलिस पैकेट निर्माण का विरोध किया गया तथा बताया गया कि क्षेत्र में इस क्षेत्र में पुलिस पिकेट का कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि इस गांव के सामने ही लटकटो पुलिस पिकेट तथा सामने ही मधुबन थाना एवं पारसनाथ पर्वत स्थित सीआरपीएफ कैंप एवम मधुबन स्थित सीआरपीएफ का कैंप है, इसके बावजूद इस गांव में पुलिस कैंप का निर्माण का कोई औचित्य नहीं है.
इसलिए आज आसपास के ग्रामीण बैठकर विचार विमर्श करते हुए झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री को पत्र के माध्यम से अवगत कराया जाएगा. ग्रामीणों द्वारा इस बाबत मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नाम एक आवेदन तैयार किया गया है जिसमें बताया गया है कि 28 नवंबर के दैनिक जागरण अखबार के माध्यम से ग्रामीणों को पता चला है कि टेसाफुली गांव में सीआरपीएफ पुलिस पिकेट का निर्माण संभावित है. बताया कि जिस जगह पिकेट बनाने के लिए सीआरपीएफ वालों ने सर्वे किया है वह जमीन रैयती प्लॉट है. पत्र के माध्यम से ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अवगत कराया है कि उपायुक्त गिरिडीह के निर्देशानुसार जब तक पुलिस पिकेट नहीं बन जाता है तब तक गांव के विद्यालय को ही सीआरपीएफ विकेट के रूप में तब्दील किया जाएगा.
बताया है कि विद्यालय को सीआरपीएफ कैंप के रूप में तब्दील हो जाने से बच्चों का पठन-पाठन ठप हो जाएगा तथा इस क्षेत्र में पुलिसिया जुल्म अत्याचार भी बढ़ जाएगा. इस हेतु ग्रामीणों द्वारा मुख्यमंत्री से गुहार लगाया गया है कि टेसा फूली में संभावित सीआरपीएफ कैंप का निर्माण रोका जाए. गांव के रहने वाले विनीता देवी का कहना है कि हमारा गांव पहाड़ और जंगल के बीचो-बीच है अगर हम लोग जंगल में लकड़ी चुनने या मवेशी को चराने जाते हैं उस दरमियान अगर पुलिस जंगल में मिल जाती है तो हमसे और हमारे बहु बेटियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए करते हुए थाना ले जाने की धमकी अथवा मारपीट भी करते हैं. अगर हमारे गांव में सीआरपीएफ का कैंप बन जाता है तो यह पुलिस वाले ग्रामीणों के साथ विभिन्न प्रकार के अत्याचार करेंगे जिसका डर सता रहा है.
वही बुधनी देवी का कहना है कि जिस जगह सीआरपीएफ का कैम्प संभावित है वह रैयती जमीन है जिसमें हमारे मवेशी चरते हैं तथा बहू बेटियां भी शौच करने आती है इस के अगल-बगल हमारे खेत खलियान है. हमारे दादा परदादा द्वारा रखे गए इस जमीन पर सीआरपीएफ केम्प का निर्माण कभी नहीं होने देंगे. वही ग्रामीण महा किस्कू के अनुसार इस जमीन पर हमारा हक है हम इस जमीन के बदले जान दे देंगे परंतु हरगिज़ यहां पर सीआरपीएफ कैंप का निर्माण नहीं होने देंगे.
वही ग्रामीण निर्मल किस्कू का कहना है कि पहले सरकार द्वारा यह बताया जा रहा था कि इस क्षेत्र में अस्पताल का निर्माण करवाया जाएगा जिसका हम लोगों को खुशी थी परंतु अचानक अखबार के माध्यम से यह पता चला कि इस जमीन पर सीआरपीएफ का कैंप निर्माण होगा तब से हम ग्रामीणों में बेचैनी है जिसका मुख्य कारण है सीआरपीएफ के जवानों द्वारा अत्याचार हम लोग जान दे देंगे लेकिन इस जमीन पर सीआरपीएफ कैंप का निर्माण नहीं होने देंगे. इस दौरान भारी संख्या में महिला पुरुष हरवे हथियार के साथ टेसाफूली मैदान में उपस्थित थे.
















