15-year-old student dies in Gumla due to unavailability of ambulance and oxygen.

सिस्टम की लापरवाही: गुमला में एंबुलेंस और ऑक्सीजन न मिलने से 15 वर्षीय छात्रा की मौत, पिता की गोद में निकली जान

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15-year-old student dies in Gumla due to unavailability of ambulance and oxygen.

दीपक गुप्ता / गुमला

गुमला: गुमला जिले के चैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का एक भयावह चेहरा सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण 9वीं कक्षा की 15 वर्षीय छात्रा शिवानी कुमारी ने एंबुलेंस और ऑक्सीजन के अभाव में अपने माता-पिता की गोद में दम तोड़ दिया।

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क्या है पूरा मामला?

मृतका शिवानी को तेज सिरदर्द और लगातार उल्टी की शिकायत के बाद परिजन इलाज के लिए चैनपुर सीएचसी ले गए थे। वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया। आरोप है कि रेफर करने के बाद जब परिजनों ने एंबुलेंस की मांग की, तो अस्पताल प्रबंधन ने ‘एंबुलेंस खराब है और स्टार्ट नहीं हो रही’ कहकर मदद करने से साफ इनकार कर दिया।

एक-दो घंटे तक मदद के लिए तड़पते रहे परिजन

अस्पताल से एंबुलेंस न मिलने के कारण परिजन करीब दो घंटे तक परिसर में ही मदद की आस में बैठे रहे, लेकिन किसी ने उनकी सुध नहीं ली। इसके बाद हताश पिता ने किसी तरह एक निजी पिकअप वैन का इंतजाम किया। हैरानी की बात यह है कि इतनी गंभीर स्थिति होने के बावजूद अस्पताल की ओर से मरीज को एंबुलेंस के साथ मिलने वाली बुनियादी सुविधा, जैसे कि ‘ऑक्सीजन सिलेंडर’ तक उपलब्ध नहीं कराया गया।

रास्ते में टूटी सांसें

अस्पताल से निकलने के बाद, बिना ऑक्सीजन के छात्रा की हालत लगातार बिगड़ती गई और इलाज तक पहुँचने से पहले ही उसने अपने माता-पिता की गोद में ही अंतिम सांस ली।

स्थानीय लोगों में आक्रोश

इस घटना के बाद से पूरे इलाके में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली को लेकर भारी गुस्सा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्वास्थ्य केंद्र पर समय रहते ऑक्सीजन और एंबुलेंस की सुविधा मिल जाती, तो आज शिवानी जीवित होती।

सवालिया घेरे में स्वास्थ्य विभाग

एंबुलेंस का बैकअप क्यों नहीं: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर एक ही एंबुलेंस का होना और उसके खराब होने पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होना बड़ी प्रशासनिक विफलता है।

संवेदनहीनता: क्या अस्पताल में जीवनरक्षक ऑक्सीजन तक की व्यवस्था नहीं है?

जवाबदेही किसकी: इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है ताकि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सके।

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