1932 संवैधानिक नहीं,भारत के मूल संविधान के साथ सत्तापक्ष एवं विपक्ष ने खिलवाड़ किया : कैलाश यादव

1932 संवैधानिक नहीं,भारत के मूल संविधान के साथ सत्तापक्ष एवं विपक्ष ने खिलवाड़ किया : कैलाश यादव

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1932 संवैधानिक नहीं,भारत के मूल संविधान के साथ सत्तापक्ष एवं विपक्ष ने खिलवाड़ किया,देश के किसी भी राज्य में 3 या 15 वर्ष तक रहने वाले स्थानीय हैं : कैलाश यादव
मंच 1932 का विरोध करता है, सड़क एवं न्यायालय तक संघर्ष जारी रहेगा, हेमंत सरकार राज्य में लोगो के बीच दीर्घकालीन भेद भाव व वैमनसव की स्थिति पैदा किया, इंची इंची जमीन पर निवासियों का अधिकार : नवनिर्माण मंच

 

झारखण्ड नवनिर्माण मंच के केंद्रीय अध्यक्ष कैलाश यादव ने विधानसभा का विशेष सत्र में 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति बनाने के प्रस्ताव पर सतापक्ष और विपक्ष दोनों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि झारखंड देश का पहला ऐसा राज्य है जहां भारतीय संविधान के मूल रूप के साथ खिलवाड़ कर झारखंडवासियों को ठगने का काम किया गया है !
ज्ञातव्य है कि 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति किसी भी हाल में संवैधानिक निर्णय नहीं है क्योंकि देश की आजादी के पहले का कानून को भारत का संविधान कभी इजाजत नहीं देता है !
भारत के किसी भी राज्य में 3 वर्ष या अधिकतम 15 वर्षो से रहने वाले लोगो को राज्य का स्थानीय निवासी माना जाता है ! जबकि झारखंड एक अनोखा राज्य है जहां ब्रिटिश सरकार का बनाया हुआ सर्वे 1932 का आधार मानकर स्थानीय नीति बनाने का प्रस्ताव पारित किया जाता है !

1932 संवैधानिक नहीं,भारत के मूल संविधान के साथ सत्तापक्ष एवं विपक्ष ने खिलवाड़ किया : कैलाश यादव

यादव ने कहा कि राज्य में रहने वाले लोगो का इंची इंची जमीन में पूर्ण अधिकार है ! मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन का विगत महीनो से मानसिक संतुलन बिगड़ा हुआ है जबकि इन्होंने ही पिछले बजट सत्र के दौरान सदन में स्पष्ट रूप से आधिकारिक ब्यान दिया था की किसी भी हाल में 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति लागू नहीं हो सकता है, क्योंकि यह विषय असंवैधानिक है और न्यायालय खारिज कर देगा, उसके बाद किस कारण से राज्य के साढ़े तीन करोड़ लोगो को बेवकूफ बनाने का काम कर रहे हैं !
झारखण्ड नवनिर्माण मंच 1932 का पुरजोर विरोध करता है जनविरोधी निर्णय के खिलाफ अंतिम सांस तक सड़क से लेकर न्यायालय तक मंच के बैनर तले संघर्ष किया जाएगा !

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