बाघमारा: जमुनिया नदी पर ‘कोयला माफिया’ का साया, ग्राम स्वराज अभियान ने DC से लगाई गुहार
धनबाद: बाघमारा की जीवनरेखा मानी जाने वाली जमुनिया नदी एक बार फिर अवैध कोयला माफियाओं के निशाने पर है। 20 दिनों की राहत के बाद, नदी के गर्भ में अवैध खनन की गतिविधियां दोबारा शुरू हो गई हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरणविदों में भारी आक्रोश है।
25 मई से फिर सक्रिय हुए माफिया
ग्राम स्वराज अभियान के प्रमुख जगत महतो ने धनबाद उपायुक्त (DC) को लिखे पत्र में सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जिस अवैध खनन को प्रशासन और स्थानीय प्रतिरोध के दबाव के कारण 20 दिनों के लिए रोक दिया गया था, वह 25 मई से फिर शुरू हो गया है। कोयला तस्करों की वापसी से न केवल क्षेत्र की शांति भंग हुई है, बल्कि नदी के अस्तित्व पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
नदी का स्वरूप बिगड़ने से गहराया जल संकट का डर
जगत महतो ने अपनी शिकायत में चेतावनी दी है कि जमुनिया नदी के अंदर चल रही अवैध खुदाई से इसका प्राकृतिक स्वरूप नष्ट हो रहा है। उन्होंने कहा:
“जमुनिया केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारे गांवों की जीवनरेखा है। यदि अवैध खनन को तत्काल नहीं रोका गया, तो आने वाले दिनों में क्षेत्र में गंभीर जल संकट पैदा हो जाएगा। यह केवल एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि पर्यावरण के साथ खिलवाड़ है।”
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
ग्राम स्वराज अभियान ने केवल धनबाद उपायुक्त ही नहीं, बल्कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सांसद, स्थानीय विधायक, एसएसपी (SSP), एसडीओ (SDO), सीओ (CO), वन विभाग और संबंधित थाना प्रभारी को भी पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
जमुनिया नदी क्षेत्र में अवैध खनन पर तुरंत रोक लगाई जाए।
खनन में शामिल माफियाओं और उनके संरक्षकों की पहचान कर उन पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई हो।
नदी को खनन मुक्त क्षेत्र घोषित कर वहां स्थाई निगरानी सुनिश्चित की जाए।
अभियान से जुड़े सदस्यों का कहना है कि यदि प्रशासन ने इस बार भी मामले को नजरअंदाज किया, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। फिलहाल, पूरे क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं गर्म हैं और ग्रामीणों की नजरें प्रशासन द्वारा लिए जाने वाले अगले कदम पर टिकी हैं।
नोट : खबर सोशल मीडिया से ली गयी है…
















