डिमना लेक की बदहाली: पर्यटन हब बनने की राह में सुरक्षा और स्वच्छता सबसे बड़ी बाधा
नीरज तिवारी / जमशेदपुर
जमशेदपुर: पहाड़ों की गोद में बसा डिमना लेक, जो कभी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए शहर की पहचान हुआ करता था, आज बदहाली की कगार पर है। वन विभाग द्वारा इसे एक प्रमुख ‘पर्यटन हब’ के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम चल रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इस सपने की राह में बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है।
असामाजिक तत्वों का जमावड़ा, सुरक्षा पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और पर्यटकों की मानें तो डिमना लेक परिसर अब असुरक्षित होता जा रहा है। बोड़ाम थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस पर्यटन स्थल पर पुलिस की नियमित गश्त न होने के कारण असामाजिक तत्वों का बोलबाला रहता है। खुलेआम शराब का सेवन और परिसर में छोड़ी गई खाली बोतलें व प्लास्टिक कचरा न केवल इसकी सुंदरता को ग्रहण लगा रहे हैं, बल्कि आने वाले परिवारों के लिए असहज माहौल भी पैदा कर रहे हैं।
छात्रों ने संभाली स्वच्छता की कमान
प्रशासनिक उदासीनता के बीच, शहर के युवा एक उम्मीद की किरण बनकर उभरे हैं। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर करीम सिटी कॉलेज, ज्ञान गंगा पब्लिक स्कूल और अन्य शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने वन विभाग के सहयोग से एक बड़े सफाई अभियान का नेतृत्व किया। छात्रों ने लेक किनारे पसरे प्लास्टिक और अन्य कचरे को साफ कर एक संदेश दिया। छात्रों और शिक्षकों ने मांग की है कि प्रशासन केवल दिखावटी अभियानों के बजाय नियमित निगरानी और सख्त सुरक्षा तंत्र लागू करे।
विकास की बड़ी योजना: नींव या दिखावा?
वन विभाग ने डिमना लेक को आकर्षक बनाने के लिए कुटिमाकुली क्षेत्र में 10 आधुनिक ‘रेस्ट हाउस’ बनाने की योजना तैयार की है। लेकिन जानकारों का मानना है कि:
बुनियादी सुविधाएं पहले जरूरी: रेस्ट हाउस बनाने से पहले स्वच्छता के लिए डस्टबिन और कचरा प्रबंधन की स्थाई व्यवस्था जरूरी है।
सुरक्षा का जिम्मा: जब तक सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा गार्डों की तैनाती नहीं होगी, पर्यटक यहाँ आने से कतराएंगे।
नियमों की सख्ती: सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने और नशा करने वालों के खिलाफ भारी जुर्माने का प्रावधान होना चाहिए।

















