लोहरा आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और जाति प्रमाण पत्र की समस्या पर हुई बैठक
गुमला : गुमला जिले के सिसई प्रखंड अंतर्गत महुआडीपा गांव में शनिवार को लोहरा आदिवासी विकास मंच की एक बैठक केंद्रीय अध्यक्ष दिलेश्वर लोहरा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में लोहरा आदिवासी समाज के सामाजिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए मंच के केंद्रीय अध्यक्ष दिलेश्वर लोहरा ने कहा कि पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में निवास करने वाले लोहरा जनजाति के लोगों की सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत को पारंपरिक स्वरूप में संरक्षित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोहरा समुदाय की पारंपरिक कला और शिल्प का झारखंड के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
उन्होंने बताया कि छोटानागपुर क्षेत्र में ब्रिटिश शासन के खिलाफ हुए कोल विद्रोह, भगवान बिरसा मुंडा के आंदोलन तथा 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोहरा समाज द्वारा निर्मित तीर-धनुष, तलवार और भाले जैसे पारंपरिक अस्त्र-शस्त्रों का उपयोग संघर्ष में किया गया था। इससे समुदाय की ऐतिहासिक भूमिका और योगदान स्पष्ट होता है।
दिलेश्वर लोहरा ने आरोप लगाया कि संवैधानिक अधिकार प्राप्त होने के बावजूद आज भी कई लोहरा परिवार जाति प्रमाण पत्र से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि भूमिहीन होने के कारण अनेक लोगों का जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है, जिससे उनके बच्चों को शिक्षा एवं रोजगार में मिलने वाले आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि जाति प्रमाण पत्र नहीं मिलने से लोहरा समाज के कई छात्र-छात्राएं शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़ रहे हैं। बैठक में समाज के लोगों ने सरकार और प्रशासन से इस समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की।
बैठक में लोहरा समाज के सामाजिक उत्थान, सांस्कृतिक संरक्षण तथा युवाओं को शिक्षा से जोड़ने के मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। समाज के लोगों ने अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर संगठित रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।


















