राज्यसभा चुनाव: कानूनी बाधाएं पार कर मैदान में डटे परिमल नाथवानी, नामांकन पूरी तरह वैध R/O
रांची | 10 जून, झारखंड राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के लिए बुधवार का दिन राहत लेकर आया। रिटर्निंग ऑफिसर ने उनके नामांकन पत्र के खिलाफ विरोधी खेमे द्वारा उठाई गई सभी आपत्तियों को सिरे से खारिज कर दिया है। विस्तृत कानूनी समीक्षा के बाद निर्वाचन अधिकारी ने नाथवानी के पर्चे को वैध करार देते हुए इसे स्वीकार कर लिया है।
क्या थीं आपत्तियां और क्या रहा समाधान?
नामांकन की स्क्रूटनी के दौरान प्रतिद्वंद्वियों ने कई तकनीकी और कानूनी बिंदुओं पर सवाल उठाए थे, जिनका निवारण रिटर्निंग ऑफिसर ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 36 के तहत किया:
नो-ड्यूज सर्टिफिकेट: सरकारी आवास को लेकर NOC न जमा करने के दावे को रिकॉर्ड की जांच के बाद निराधार पाया गया।
वित्तीय पारदर्शिता: कंपनी में हिस्सेदारी छिपाने के आरोपों पर स्पष्ट किया गया कि धारा 36 के दायरे में हलफनामे की पर्याप्तता की जांच संभव नहीं है, अतः नामांकन रद्द नहीं किया जा सकता।
नाम का तालमेल: चुनावी रोल और नामांकन पत्र में नाम के प्रारूप में अंतर को एक तकनीकी त्रुटि माना गया, जिसे ठोस साक्ष्यों के साथ स्पष्ट कर दिया गया।
फॉर्म 26 की खामियां: खाली कॉलम को लेकर उठाए गए मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए RO ने कहा कि बाद में दिए गए स्पष्टीकरण के आधार पर नामांकन को वैध माना जाएगा।
रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश के मुताबिक परिमल नाथवानी किसी भी कानूनी प्रावधान के तहत अयोग्य नहीं हैं। धारा 36(4) का हवाला देते हुए आदेश में कहा गया कि मामूली तकनीकी त्रुटियों के आधार पर किसी भी उम्मीदवार का नामांकन खारिज करना उचित नहीं है।
इस फैसले के साथ ही परिमल नाथवानी की उम्मीदवारी पर मंडरा रहे तमाम कानूनी अंदेशे समाप्त हो गए हैं और वे अब पूरी मजबूती के साथ राज्यसभा चुनाव के चुनावी रण में बने हुए हैं।
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