झारखंड राज्यसभा चुनाव: ’56 बनाम 61′ की जंग, सोशल मीडिया पर चला सियासी ‘माइंड गेम’
रांची: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार को होने वाले मतदान से ठीक पहले सियासी पारा अपने चरम पर है। सत्ताधारी महागठबंधन (INDIA Bloc) और विपक्षी एनडीए (NDA) के बीच संख्या बल और रणनीतिक ‘माइंड गेम’ ने चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है।
महागठबंधन का ’61’ वाला नारा और BJP की जारी तस्वीर
मंगलवार को महागठबंधन की ओर से उछाले गए “56 नहीं, 61” के नारे ने विपक्ष की नींद उड़ा दी है। गठबंधन नेताओं का दावा है कि उनके पास घोषित संख्या बल (56) से ज्यादा समर्थन मौजूद है।
इस बीच, बुधवार को एनडीए द्वारा अपने 24 विधायकों की एकजुटता वाली तस्वीर जारी करने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने तीखा हमला बोला है। झामुमो ने अपने आधिकारिक हैंडल से उस तस्वीर को साझा करते हुए इसे भाजपा की राजनीति का “आईना” करार दिया।
झामुमो ने अपने पोस्ट में मुख्य रूप से तीन बड़े हमले किए:
उम्मीदवार पर सवाल: झामुमो ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के सभी विधायक एक “बाहरी सूटकेस वाले गुजराती उम्मीदवार” को जिताने के लिए एकजुट नजर आ रहे हैं।
स्वाभिमान पर चोट: पार्टी ने लिखा कि जो नेता झारखंड की अस्मिता, स्थानीयता और स्वाभिमान पर बड़े-बड़े भाषण देते थे, आज वे रेडिसन होटल के दरवाजे पर खड़े होकर अपने दावों की धार खो चुके हैं।
एनडीए का शक्ति प्रदर्शन
विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए भाजपा ने बुधवार को अपने सभी 24 विधायकों के साथ एक सामूहिक तस्वीर जारी की। तस्वीर के साथ एनडीए है तैयार, कांग्रेस होगी दरकिनार का नारा देकर भाजपा ने अपनी एकजुटता का स्पष्ट संदेश दिया है। विजय के प्रतीक ‘वी’ साइन के साथ जारी की गई इस तस्वीर को भाजपा खेमे का आत्मविश्वास माना जा रहा है।
पारदर्शिता के लिए कड़े नियम
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और क्रॉस वोटिंग को रोकने के लिए सभी दलों ने अपने अधिकृत चुनाव एजेंट नियुक्त किए हैं। नियमों के अनुसार, मतदान के समय विधायकों को अपने मतपत्र अपने दल के चुनाव एजेंट को दिखाना अनिवार्य होगा।
नियुक्त किए गए प्रमुख चुनाव एजेंट:
कांग्रेस: के. राजू और बेला प्रसाद
झामुमो: सुदिव्य कुमार सोनू और विनोद पांडेय
राजद: भोला यादव
भाजपा: नवीन जायसवाल और अमर कुमार बाउरी
क्या है चुनावी गणित?
झारखंड विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए उम्मीदवार को पहली वरीयता के 28 मतों की आवश्यकता होती है। जहां महागठबंधन के पास 56 का आंकड़ा है, वहीं एनडीए के पास 24 विधायक हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या क्रॉस वोटिंग की संभावनाएं सच होती हैं या फिर दोनों खेमे अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने में सफल रहते हैं।
गुरुवार को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि इन दोनों सीटों पर किसका कब्जा होता है और यह “56 बनाम 61” की सियासी जंग किस नतीजे पर जाकर थमती है।
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