हेमंत सोरेन का दिल्ली दौरा: राज्यसभा चुनाव में ‘खेल’ के बाद क्या झारखंड की राजनीति में आएगा बड़ा बदलाव?

रांची: झारखंड की सियासत में राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने एक नई आग सुलगा दी है। गुरुवार को आए परिणामों ने न केवल गणित बिगाड़ा, बल्कि सत्ताधारी गठबंधन के भीतर ‘भरोसे’ की कमी को भी सार्वजनिक कर दिया है। चुनाव के तुरंत बाद शुक्रवार को सीएम हेमंत सोरेन का दिल्ली कूच करना महज एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि डैमेज कंट्रोल की कवायद मानी जा रही है।
क्या हुआ राज्यसभा चुनाव में?
झारखंड की दो सीटों के लिए हुए इस त्रिकोणीय मुकाबले में एनडीए समर्थित परिमल नथवानी और झामुमो के बैजनाथ राम ने जीत का परचम लहराया। लेकिन, इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा चर्चा कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की हार की हो रही है। संख्या बल को देखते हुए कांग्रेस अपनी जीत के प्रति आश्वस्त थी, लेकिन मतदान के दौरान हुए ‘खेल’ ने सब कुछ उलट दिया।
क्यों है यह दौरा अहम?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीएम हेमंत सोरेन का अचानक दिल्ली जाना तीन बड़े सवालों पर केंद्रित है:
1.क्रॉस वोटिंग का ‘जीन‘: कांग्रेस और झामुमो के खेमे में इस बात पर माथापच्ची हो रही है कि आखिर वोट कहां कटे? गठबंधन के भीतर मौजूद सहयोगी दलों (आरजेडी और वाम दल) के रुख पर सीएम शीर्ष नेतृत्व से गंभीर चर्चा कर सकते हैं।
2. गठबंधन की स्थिरता: क्या यह हार केवल एक सीट का नुकसान है या आने वाले समय में विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन में दरार की शुरुआत? सोरेन का हाईकमान के साथ बैठकर यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि राज्य में सरकार की पकड़ कमजोर न हो।
3. दिल्ली का संदेश: दिल्ली से मिलने वाला संकेत तय करेगा कि आने वाले दिनों में झारखंड के मंत्रिमंडल और गठबंधन की रणनीति में कोई बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा या नहीं।
सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म
राज्यसभा चुनाव में ‘क्रॉस वोटिंग’ ने स्पष्ट कर दिया है कि गठबंधन के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। जहाँ एक ओर बीजेपी इसे ‘हौसले की जीत’ बता रही है, वहीं सत्ता पक्ष के लिए यह आत्ममंथन का दौर है। अब नजरें टिकी हैं हेमंत सोरेन की दिल्ली से वापसी पर—कि वे अपने साथ सरकार को बचाने का कौन सा ‘ब्लूप्रिंट’ लेकर लौटते हैं।
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