गुमला: इलाज के लिए पत्नी ने सड़क पर फैलाया आंचल, मुख्यमंत्री के संज्ञान के बाद जागी प्रशासन की नींद

दीपक गुप्ता / गुमला
गुमला: सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के खोखले दावों की पोल खोलती एक तस्वीर गुमला की सड़कों से सामने आई है। सदर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे अपने पति की जान बचाने के लिए एक पत्नी को दर-दर की ठोकरें खाने और राहगीरों के सामने आंचल फैलाने पर मजबूर होना पड़ा। यह केवल एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर करारा तमाचा है जो गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने का दंभ भरती है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित जगन्नाथ तिर्की पिछले कई दिनों से गुमला सदर अस्पताल में भर्ती हैं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने शुरुआती जांच और उपचार के बाद संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए। परिवार की माली हालत पहले से ही बेहद दयनीय थी, ऐसे में इलाज के खर्च का बोझ उनके लिए पहाड़ जैसा हो गया। थक-हारकर, पति को मौत के मुंह से बचाने के लिए पत्नी ने शहर की व्यस्त सड़कों पर उतरकर मदद की गुहार लगाई।
व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
जब सरकार स्वास्थ्य सुरक्षा और मुफ्त इलाज के बड़े-बड़े दावे करती है, तो फिर एक पत्नी को अपने पति की जान बचाने के लिए भीख मांगने की नौबत क्यों आई?
क्या सरकारी योजनाएं महज फाइलों और कागजों तक ही सीमित रह गई हैं?
क्या संसाधनों की कमी का बहाना बनाकर गरीबों को दर-दर भटकने के लिए छोड़ देना ही व्यवस्था का एकमात्र विकल्प है?
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद हरकत में आया प्रशासन
इस अमानवीय घटना की जानकारी सामने आते ही मामले ने तूल पकड़ लिया। संवेदनशीलता दिखाते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस पर त्वरित संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने गुमला के उपायुक्त (DC) को निर्देशित किया है कि पूरे मामले की गहन जांच की जाए। साथ ही, जगन्नाथ तिर्की के समुचित इलाज के लिए हर संभव स्वास्थ्य सुविधा सुनिश्चित करने और किए गए प्रयासों से सूचित करने का आदेश दिया है।
‘दृष्टि नाउ’ की अपील:
एक मरीज का अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी के लिए संघर्ष करना और बाहर उनकी पत्नी का मदद के लिए भटकना, हमारे समाज और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद जगन्नाथ तिर्की को बेहतर इलाज मिल पाएगा और आगे से किसी अन्य परिवार को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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