डॉ. प्रदीप वर्मा का कांग्रेस पर हमला, कहा- “पेपर लीक की फैक्ट्री बनीं विपक्षी सरकारें”

रांची : राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर पेपर लीक के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और गैर-एनडीए दलों की सरकारों के कार्यकाल में लगातार प्रश्नपत्र लीक, परीक्षाओं के रद्द होने और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ के मामले सामने आए हैं, जबकि वही दल आज इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं।
डॉ. वर्मा ने कहा कि वर्ष 2018 से 2026 के बीच कांग्रेस, उसके सहयोगी दलों तथा अन्य गैर-एनडीए सरकारों के शासनकाल में कम-से-कम 10 राज्यों में 13 बड़े पेपर लीक और परीक्षा अनियमितता के मामले सामने आए। इन घटनाओं के कारण लाखों विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों को मानसिक, आर्थिक और शैक्षणिक नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने झारखंड की झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि राज्य में परीक्षा व्यवस्था अविश्वसनीय हो चुकी है। उन्होंने जेएसएससी संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा और झारखंड अधिविद्य परिषद (जैक) की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं का उल्लेख करते हुए इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता बताया।
राज्यसभा सांसद ने कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र, केरल, बिहार, ओडिशा और तेलंगाना में भी विभिन्न परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि विपक्षी दलों को पहले अपने शासनकाल का हिसाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन राज्यों में दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई और प्रभावित अभ्यर्थियों को क्या राहत दी गई।

डॉ. वर्मा ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल पेपर लीक जैसे संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ किया गया संगठित अपराध है।
उन्होंने मांग की कि देशभर में सामने आए सभी पेपर लीक मामलों की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही दोषी अधिकारियों, परीक्षा माफिया, दलालों और लाभार्थियों की पहचान कर उनकी संपत्ति जब्त की जाए तथा प्रभावित अभ्यर्थियों को आर्थिक क्षतिपूर्ति प्रदान की जाए।
डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों को युवाओं से अपनी विफलताओं के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और पेपर लीक के मुद्दे पर राजनीति बंद करनी चाहिए।

















