40 साल बाद गिरफ्तारी, भाई बोला- “कई बार सरेंडर करने को कहा, लेकिन उसने कभी बात नहीं मानी”

गिरिडीह: देश के सबसे वांछित माओवादी नेताओं में शामिल 1 करोड़ रुपये के इनामी मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद उसके पैतृक गांव से परिवार की भावुक प्रतिक्रिया सामने आई है। करीब चार दशक तक घर से दूर रहे मिसिर बेसरा को लेकर उसके भाई देवीलाल बेसरा ने कहा कि परिवार ने कई बार उसे आत्मसमर्पण कर सामान्य जीवन में लौटने की सलाह दी, लेकिन उसने कभी उनकी बात नहीं मानी।

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देवीलाल बेसरा ने बताया कि उन्हें सूचना मिली है कि सुरक्षा बलों ने मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने कहा, “करीब 40 साल हो गए, वह घर नहीं आया। हमने कई बार कहा कि सरेंडर कर दो और परिवार के बीच लौट आओ, लेकिन उसने हमारी कोई बात नहीं सुनी।”
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उन्होंने बताया कि परिवार वर्षों तक उससे संपर्क करने की कोशिश करता रहा, लेकिन जंगलों में सक्रिय रहने और भूमिगत जीवन के कारण उससे मुलाकात नहीं हो सकी। लंबे समय तक परिवार सिर्फ उसके लौटने का इंतजार करता रहा।
देवीलाल के अनुसार, मिसिर बेसरा का एक बेटा है। इस दौरान उसकी पत्नी और बेटी का निधन हो चुका है। परिवार बिखर गया, लेकिन इस उम्मीद में रहा कि एक दिन वह घर जरूर लौटेगा।
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मिसिर बेसरा का नाम लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल रहा है। उसकी गिरफ्तारी को नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है। वहीं, इस घटनाक्रम ने उस परिवार का दर्द भी सामने ला दिया है, जिसने चार दशक तक अपने सदस्य के लौटने की उम्मीद नहीं छोड़ी।
















