Four top Maoists, including Misir Besra—who carried a reward of 2.20 crore—arrested.

झारखंड में माओवाद पर सबसे बड़ा प्रहार: 2.20 करोड़ रुपये के इनामी मिसिर बेसरा समेत चार शीर्ष माओवादी गिरफ्तार, 25 वर्षों के खूनी इतिहास का हुआ अंत

Four top Maoists, including Misir Besra—who carried a reward of 2.20 crore—arrested.

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रांची: झारखंड में माओवाद के खिलाफ चलाए जा रहे संयुक्त अभियानों में सुरक्षा बलों को अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिली है। ‘ऑपरेशन दौरा पहाड़’ के तहत झारखंड पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों, धनबाद और गिरिडीह जिला पुलिस तथा 209 कोबरा बटालियन ने भाकपा (माओवादी) के एकमात्र सक्रिय पोलित ब्यूरो सदस्य और 2.20 करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर उर्फ सुर्निमल को उसके तीन अन्य साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया है।

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पुलिस मुख्यालय ने बुधवार को PC करते हुए कहा कि इस गिरफ्तारी से झारखंड में भाकपा (माओवादी) संगठन को निर्णायक झटका लगा है। पुलिस का दावा है कि राज्य में माओवादी संगठन की रीढ़ टूट चुकी है और इसका नेटवर्क लगभग समाप्ति की कगार पर पहुंच गया है।

धनबाद के बरवड्डा जंगल से गिरफ्तारी

28 जुलाई को चलाए गए विशेष अभियान में सुरक्षा बलों ने धनबाद जिले के बरवड्डा थाना क्षेत्र के जंगलों में घेराबंदी कर मिसिर बेसरा, मेहनत उर्फ मोछु उर्फ विभीषण, गौरव उर्फ बिरेंद्र हांसदा उर्फ सौरभ समेत कुल चार माओवादियों को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से तीन AK-47 राइफल और 288 राउंड कारतूस बरामद किए गए हैं।

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25 वर्षों तक दहशत का पर्याय रहा मिसिर बेसरा

मिसिर बेसरा पिछले ढाई दशक से झारखंड, बिहार और आसपास के राज्यों में माओवादी हिंसा का प्रमुख चेहरा रहा है। उसके नेतृत्व और साजिश में सुरक्षा बलों पर कई बड़े हमले, हथियारों की लूट, जेल ब्रेक और IED विस्फोट जैसी घटनाएं हुईं, जिनमें दर्जनों जवान और आम नागरिक मारे गए।

उसके नाम से जुड़ी प्रमुख घटनाएं इस प्रकार है जिसके सुनते ही आपके होश उड़ जाएंगे ..जिसमे

सितंबर 2001: हजारीबाग के चुरचू में सीआरपीएफ पर हमला, 12 जवान शहीद, भारी मात्रा में हथियार लूटे।

अक्टूबर 2001: धनबाद के तोपचांची में पुलिस पर हमला, 13 पुलिसकर्मी शहीद, 18 SLR सहित कई हथियार लूटे।

दिसंबर 2002: मनोहरपुर में पुलिस पर घात लगाकर हमला, पुलिसकर्मियों की हत्या और 26 राइफल समेत बड़ी मात्रा में हथियार लूटे।

अप्रैल 2003: बोकारो के चंद्रपुरा रेल थाना पर हमला कर 23 राइफल और अन्य हथियार लूटे।

जून 2004: गुवा और रनिया क्षेत्र में पुलिस बल पर हमले, कई जवान शहीद और हथियार लूटे गए।

जून 2005: उत्तर बिहार के मधुबन में थाना, बैंक और प्रखंड कार्यालय पर हमला कर नकदी और हथियार लूटे।

नवंबर 2005: गिरिडीह होमगार्ड शस्त्रागार से 186 राइफलें लूटीं।

नवंबर 2005: चर्चित जहानाबाद जेल ब्रेक की साजिश में भूमिका।

7 जून 2018: कुचाई क्षेत्र में मुठभेड़, एसआई बनुआ उरांव और कोबरा का एक जवान शहीद

4 जनवरी 2022: पूर्व विधायक गुरुचरण नायक के दो अंगरक्षकों की हत्या, 2 INSAS और 1 AK-47 लूटी।

मार्च 2023: बड़ाजामदा क्षेत्र में विस्फोटक भंडार लूटा।

12 जुलाई 2023: गोइलकेरा में मुठभेड़ के दौरान कोबरा 209 बटालियन के डिप्टी कमांडेंट दीपक कुमार तिवारी घायल

14 अगस्त 2023: टोंटो क्षेत्र में मुठभेड़, झारखंड जगुआर के एसआई अमित तिवारी और आरक्षी गौतम कुमार शहीद

22 मार्च 2025: छोटानागरा में IED विस्फोट, सीआरपीएफ के एसआई सुनील कुमार मंडल शहीद

12 अप्रैल 2025: IED हमले में झारखंड जगुआर के आरक्षी सुनील धान शहीद

31 मई 2025: पहले से लगाए गए IED की चपेट में आने से एक ग्रामीण की मौत।

10 अक्टूबर 2025: जराईकेला क्षेत्र में IED विस्फोट, सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल महेंद्र लश्कर शहीद

1 मार्च 2026: मनोहरपुर-छोटानागरा क्षेत्र में मुठभेड़ और IED विस्फोट में कोबरा के अधिकारी व जवान घायल हुए।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी माओवादी संगठन के लिए सबसे बड़ा झटका है। वर्षों से सुरक्षा बलों की वांछित सूची में शामिल यह नेता कई राज्यों में सक्रिय उग्रवादी गतिविधियों का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता था। उसकी गिरफ्तारी से न केवल माओवादी नेटवर्क कमजोर होगा, बल्कि संगठन की भविष्य की गतिविधियों पर भी गहरा असर पड़ेगा।

फिलहाल गिरफ्तार सभी माओवादियों से संयुक्त पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां उनके नेटवर्क, हथियारों की आपूर्ति, वित्तीय स्रोतों और अन्य सक्रिय सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटाने में लगी हैं। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ से माओवादी संगठन के शेष तंत्र को ध्वस्त करने में महत्वपूर्ण सुराग मिलेंगे।

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