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JPSC परीक्षा विवाद: CID पूछताछ में OMR, TDPL और रिजल्ट प्रक्रिया पर बड़ा खुलासा

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रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक और अनियमितता मामले की जांच कर रही CID की पूछताछ में कई महत्वपूर्ण बातें सामने आने का दावा है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक मामले में आरोपी बनाई गईं JPSC की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से पूछताछ के दौरान आयोग की कार्यप्रणाली, परीक्षा सामग्री की सुरक्षा, निजी कंपनी TDPL की भूमिका और रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर जानकारी ली गई।

साथ ही पूछताछ में सामने आए कथित बयानों के अनुसार, परीक्षा प्रक्रिया के दौरान OMR शीट की स्कैनिंग और लिखित परीक्षा से जुड़े कुछ कार्यों में TDPL के कर्मचारियों की भूमिका थी। वहीं, कंपनी के इंपैनलमेंट को लेकर भी तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते के निर्देश का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है।

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पेपर लीक की सूचना मिलने का दावा

पूछताछ के दौरान श्वेता गुप्ता ने कथित तौर पर बताया कि रामवीर सिंह ने उन्हें जानकारी दी थी कि धर्मेंद्र नाम का व्यक्ति उस पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के लिए दबाव बना रहा था। श्वेता के अनुसार, इस जानकारी को उन्होंने तत्कालीन JPSC अध्यक्ष तक पहुंचाया था।

उनका कहना था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अध्यक्ष को इसकी जानकारी इसलिए दी गई थी, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके। अब जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि कथित तौर पर मिली सूचना के बाद आयोग स्तर पर क्या कदम उठाए गए थे।

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TDPL के चयन पर भी सवाल

पूछताछ में TDPL के इंपैनलमेंट का मुद्दा भी सामने आया। श्वेता गुप्ता के कथित बयान के मुताबिक, कंपनी को लेकर ब्लैकलिस्ट किए जाने की चर्चा थी, लेकिन आयोग की ओर से उन्हें मौखिक रूप से बताया गया कि कंपनी ब्लैकलिस्टेड नहीं है।

उन्होंने कथित तौर पर बताया कि TDPL को इंपैनल करने का अंतिम निर्णय तत्कालीन अध्यक्ष का था और उन्हें केवल प्रक्रिया के तहत संबंधित फाइल आगे बढ़ाने को कहा गया था। श्वेता के अनुसार, उन्होंने कंपनी के वित्तीय कोटेशन की जांच की थी और वह सही पाया गया था।

जांच से जुड़ी जिस कार्रवाई का उल्लेख पूछताछ में किया गया, उसे TDPL के बजाय किसी दूसरी कंपनी से संबंधित बताया गया। यह भी कहा गया कि इस जांच का निर्देश लिखित रूप में नहीं, बल्कि मौखिक तौर पर दिया गया था।

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WhatsApp के जरिए जवाब भेजने का मामला

परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े एक अन्य सवाल में उस्मान नाम के व्यक्ति को WhatsApp के माध्यम से उत्तर भेजने की बात सामने आई। श्वेता गुप्ता ने कथित तौर पर इसकी वजह समय की कमी बताई।

उनके मुताबिक, संबंधित व्यक्ति रांची से बाहर था और परिणाम जल्द जारी करने का दबाव था। इसी वजह से प्रक्रिया में समय बचाने के लिए WhatsApp के माध्यम से जानकारी भेजी गई।

हालांकि, जांच एजेंसी के लिए यह भी महत्वपूर्ण सवाल है कि परीक्षा और परिणाम से संबंधित संवेदनशील सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए आधिकारिक व्यवस्था के बजाय WhatsApp का इस्तेमाल किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में किया गया।

स्कैनिंग रूम की CCTV निगरानी पर बड़ा दावा

पूछताछ में स्कैनिंग रूम की सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा भी सामने आया। श्वेता गुप्ता के कथित बयान के अनुसार, स्कैनिंग रूम में लगे CCTV कैमरों की लाइव निगरानी तत्कालीन JPSC अध्यक्ष अपने मोबाइल फोन से करते थे।

यदि यह दावा जांच में प्रमाणित होता है, तो परीक्षा सामग्री की सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो सकते हैं। CID इस पहलू की भी जांच कर सकती है कि CCTV सिस्टम तक किस-किस अधिकारी की पहुंच थी और लाइव निगरानी की व्यवस्था किस उद्देश्य से की गई थी।

अध्यक्ष के निर्देश पर रिजल्ट तैयार करने का दावा

फाइनल रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर भी श्वेता गुप्ता ने कथित तौर पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उनके अनुसार, वह खुद परिणाम जारी करने के पक्ष में नहीं थीं क्योंकि प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की पूरी प्रक्रिया में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका नहीं रही थी।

इसके बावजूद तत्कालीन अध्यक्ष के निर्देश पर उन्होंने मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू में प्राप्त अंकों को जोड़कर अंतिम परिणाम तैयार किया। कथित बयान के मुताबिक, तैयार परिणाम को आयोग के तीनों सदस्यों के पास जांच और स्क्रूटनी के लिए भेजा गया था।

सदस्यों से दस्तावेजों के सत्यापन और क्लीयरेंस के बाद फाइल सचिव के पास भेजे जाने और फिर अध्यक्ष की मंजूरी के बाद परिणाम प्रकाशित किए जाने की बात कही गई है।

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जांच में कई कड़ियां जोड़ने की कोशिश

CID की जांच अब कथित पेपर लीक, परीक्षा सामग्री की सुरक्षा, OMR स्कैनिंग, बाहरी एजेंसी की भूमिका, अधिकारियों के बीच संचार और रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है। अब इन बयानों का उपलब्ध दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों, CCTV रिकॉर्ड तथा संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बयानों से पुष्टि cid कर सकती है।

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