बिरहोर टोला से मेरिट लिस्ट तक: शिक्षा के सहारे बेटियों ने रचा सफलता का इतिहास
टाटा स्टील फाउंडेशन के प्री-मैट्रिक कोचिंग कार्यक्रम से झारखंड और ओडिशा के 3,291 विद्यार्थियों को मिला लाभ, मुस्कान ने 75% और स्वाति ने 95.2% अंक हासिल किए
बोकारो, 10 अक्टूबर। शिक्षा के जरिए बेटियां न केवल अपना भविष्य संवार रही हैं, बल्कि परिवार और समुदाय के लिए भी नई उम्मीदें जगा रही हैं। झारखंड में बिरहोर समुदाय की मुस्कान कुमारी और रामगढ़ जिले की स्वाति कुमारी की उपलब्धियां इसकी मिसाल हैं। टाटा स्टील फाउंडेशन के प्री-मैट्रिक कोचिंग कार्यक्रम से जुड़ी मुस्कान ने दसवीं की बोर्ड परीक्षा में 75 प्रतिशत, जबकि स्वाति ने 95.2 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर टाटा स्टील फाउंडेशन ने इन छात्राओं की उपलब्धियों के माध्यम से शिक्षा और शैक्षणिक सहयोग की भूमिका को रेखांकित किया है। इन कहानियों में उन छात्राओं की उम्मीदें भी दिखाई देती हैं, जो सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद आगे बढ़ने का सपना देख रही हैं।
बिरहोर समुदाय की मुस्कान ने हासिल की सफलता
बंजी स्थित प्री-मैट्रिक कोचिंग केंद्र की छात्रा मुस्कान कुमारी ने इस वर्ष दसवीं की बोर्ड परीक्षा में 75 प्रतिशत अंक हासिल किए। वह बिरहोर समुदाय से आती हैं। बिरहोर भारत के विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) में शामिल हैं। इस समुदाय के कई परिवार दूरस्थ क्षेत्रों में रहते हैं, जहां बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नियमित शैक्षणिक मार्गदर्शन तक पहुंच चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे परिवेश से आने वाली मुस्कान की उपलब्धि बताती है कि सही मार्गदर्शन और पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल मिलने पर विद्यार्थी अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन कर सकते हैं।
स्वाति ने 95.2 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले में पाया सातवां स्थान
वेस्ट बोकारो क्षेत्र में भी प्री-मैट्रिक कोचिंग कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। जय हिंद विद्या निकेतन, सोंडीहा की छात्रा स्वाति कुमारी ने दसवीं की परीक्षा में 95.2 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। उन्होंने रामगढ़ जिले में सातवां स्थान हासिल किया। स्वाति की इस उपलब्धि ने ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं के सामने शिक्षा के जरिए आगे बढ़ने की एक प्रेरक मिसाल पेश की है।
3,291 विद्यार्थियों को मिला शैक्षणिक सहयोग
टाटा स्टील फाउंडेशन के प्री-मैट्रिक कोचिंग कार्यक्रम के तहत झारखंड और ओडिशा में सातवीं से दसवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई, विषयवार मार्गदर्शन, अतिरिक्त कक्षाओं और व्यक्तिगत परामर्श की सुविधा दी जाती है। फाउंडेशन के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस कार्यक्रम से दोनों राज्यों के कुल 3,291 विद्यार्थी लाभान्वित हुए। इनमें से 3,191 विद्यार्थियों ने दसवीं की बोर्ड परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की। कार्यक्रम के आंकड़ों के मुताबिक, कुल परीक्षा परिणाम लगभग 97 प्रतिशत रहा।
वेस्ट बोकारो के 11 केंद्रों में 1,981 विद्यार्थियों को मिली मदद
वेस्ट बोकारो में टाटा स्टील फाउंडेशन ने 11 कोचिंग केंद्रों के माध्यम से सातवीं से दसवीं कक्षा तक के 1,981 विद्यार्थियों को शैक्षणिक सहयोग दिया। सितंबर 2025 से फरवरी 2026 तक चले छह महीने के विशेष कार्यक्रम में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषयों की तैयारी पर ध्यान दिया गया।
फाउंडेशन के मुताबिक, यहां दसवीं कक्षा के सभी 700 विद्यार्थी वार्षिक माध्यमिक बोर्ड परीक्षा 2026 में सफल रहे। इसके साथ ही लगातार आठवें वर्ष शत-प्रतिशत परिणाम दर्ज करने की बात कही गई है।इन 700 सफल विद्यार्थियों में 564 ने प्रथम श्रेणी हासिल की। इनमें 287 छात्राएं थीं। वहीं, 147 विद्यार्थियों ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर विशिष्ट श्रेणी में जगह बनाई।
बिरहोर और अन्य जनजातीय विद्यार्थियों के लिए विशेष केंद्र
जनजातीय समुदायों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से बंजी स्थित मध्य विद्यालय में विशेष प्री-मैट्रिक कोचिंग केंद्र स्थापित किया गया है। यहां बिरहोर और अन्य जनजातीय समुदायों के विद्यार्थियों को पढ़ाई में सहायता दी जाती है। फाउंडेशन के अनुसार, इस केंद्र से दसवीं कक्षा के 33 विद्यार्थी जुड़े थे और सभी बोर्ड परीक्षा में सफल हुए। इनमें 14 विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी प्राप्त की, जिनमें 13 छात्राएं शामिल थीं।
पहली पीढ़ी की छात्राओं के लिए शिक्षा बनी नई उम्मीद
कार्यक्रम से लाभान्वित होने वाली कई छात्राएं ऐसे परिवारों से आती हैं, जहां वे शिक्षा हासिल करने वाली पहली पीढ़ी का हिस्सा हैं। नियमित कक्षाओं, विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन, मूल्यांकन और अतिरिक्त पढ़ाई के जरिए उन्हें अपनी शैक्षणिक कमजोरियों को दूर करने और आगे की पढ़ाई के लिए तैयार होने का अवसर मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर मुस्कान और स्वाति की उपलब्धियां इस बात को रेखांकित करती हैं कि शिक्षा तक समान पहुंच बेटियों के आत्मविश्वास और भविष्य की संभावनाओं को मजबूत कर सकती है। उचित अवसर, निरंतर मार्गदर्शन और परिवार एवं समुदाय के सहयोग से वे न केवल अपनी जिंदगी बदल सकती हैं, बल्कि अपने आसपास के लोगों के लिए भी प्रेरणा बन सकती हैं।

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