Authority to levy a cess for the development of mineral regions should be granted, and the funds must be utilized locally: Sudesh Mahto.

खनिज क्षेत्रों के विकास के लिए सेस लगाने का अधिकार मिले, राशि का उपयोग वहीं हो: सुदेश महतो

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Authority to levy a cess for the development of mineral regions should be granted, and the funds must be utilized locally: Sudesh Mahto.
Authority to levy a cess for the development of mineral regions should be granted, and the funds must be utilized locally: Sudesh Mahto.

रांची: आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने एमएमडीआर अधिनियम, मिनरल बेयरिंग लैंड सेस, डीएमएफटी फंड और राज्य सरकार के बजट खर्च को लेकर झामुमो सरकार पर निशाना साधा। हरमू स्थित आजसू पार्टी के प्रधान कार्यालय में आयोजित मीडिया संबोधन में उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों का पहला लाभ खनिज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिलना चाहिए। इस मौके पर पार्टी के केंद्रीय प्रमुख प्रवक्ता देवशरण भगत भी मौजूद थे।

सुदेश महतो ने कहा कि आजसू पार्टी की मांग है कि राज्य सरकार को मिनरल बेयरिंग लैंड पर सेस लगाने का अधिकार दिया जाए, लेकिन यह स्पष्ट शर्त हो कि सेस से प्राप्त राशि का इस्तेमाल केवल खनिज क्षेत्रों के विकास और वहां रहने वाले लोगों के कल्याण पर किया जाए। उन्होंने कहा कि एमएमडीआर अधिनियम की धारा 9D के तहत केंद्र सरकार कुछ शर्तों के साथ राज्यों को सेस लगाने की अनुमति दे सकती है।

उन्होंने कहा कि खनिज क्षेत्रों के स्कूलों में बच्चों को पोशाक, किताबें और छात्रवृत्ति, कुपोषित बच्चों व महिलाओं को पौष्टिक आहार, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और हर घर में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने जैसी योजनाओं पर यह राशि खर्च होनी चाहिए।

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आजसू अध्यक्ष ने डीएमएफटी फंड के इस्तेमाल को लेकर भी राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 10 हजार करोड़ रुपये के डीएमएफटी फंड में गड़बड़ी की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि डीएमएफटी फंड के उपयोग के लिए स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद उनका पालन नहीं किया गया। सुदेश महतो ने झामुमो पर सेस का विरोध करने को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में पुलिस संरक्षण में अवैध खनन जारी है और सरकार वैध तरीके से उत्पादित कोयले को महंगा करना चाहती है, जिससे अवैध कोयले के कारोबार को बढ़ावा मिल सके।

उन्होंने दावा किया कि सेस लगाए जाने से पहले कोयला उत्पादन की वार्षिक वृद्धि करीब 8 प्रतिशत थी, जो बाद में घटकर लगभग 2 प्रतिशत रह गई। हालांकि, इन दावों पर उन्होंने कोई विस्तृत आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया। सुदेश महतो ने कहा कि झामुमो सरकार का यह कहना कि सेस नहीं लगाने से विकास योजनाओं के लिए राशि की कमी होगी, सही नहीं है। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट खर्च का हवाला देते हुए कहा कि सरकार कुल बजट की करीब 25 प्रतिशत राशि खर्च नहीं कर पाई।

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उन्होंने दावा किया कि ग्रामीण विकास विभाग अपने बजट का करीब 40 प्रतिशत, आदिवासी कल्याण विभाग 52 प्रतिशत, पेयजल विभाग 56 प्रतिशत और स्वास्थ्य विभाग 78 प्रतिशत राशि ही खर्च कर पाया। उन्होंने कहा, “कभी धन की कमी नहीं होती, कमी नीयत की होती है।” सुदेश महतो ने कहा कि जब सरकार उपलब्ध बजट की राशि ही पूरी तरह खर्च नहीं कर पा रही है, तो अतिरिक्त राशि की कमी का सवाल उठाना उचित नहीं है।

आजसू अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी खनिज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के हित में केंद्र और राज्य के बीच संवाद और सहयोग की पक्षधर है। उन्होंने कहा कि यदि झामुमो सरकार की नीयत साफ है तो उसे तथ्यों के साथ केंद्र सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजसू डीएमएफटी की तर्ज पर सेस लगाने के राज्य सरकार के अधिकार का समर्थन करती है, लेकिन शर्त यह होनी चाहिए कि सेस से प्राप्त राशि का सीधा लाभ खनिज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिले।

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