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पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता पर बाबूलाल मरांडी का तीखा हमला: वसूली, तस्करी, खनन माफिया और भ्रष्टाचार में संरक्षण का आरोप

रांची : झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोमवार को एक बार फिर हेमंत सोरेन सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता की अवैध नियुक्ति, सेवा विस्तार और अचानक इस्तीफे के पीछे बड़े भ्रष्टाचार का खेल होने का सनसनीखेज आरोप लगाया।

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मरांडी ने प्रेसवार्ता में कहा, “अनुराग गुप्ता को दो साल तक निलंबित रखने के बाद डीजीपी बनाना, रिटायरमेंट के बाद सेवा विस्तार देना और फिर इस्तीफा लेना – इस पूरे प्रकरण के पीछे अवैध वसूली, कोयला-बालू तस्करी, अवैध उत्खनन, रंगदारी और भयादोहन का खेल चल रहा है। राज्य की जनता जानना चाहती है कि आखिर इसका रहस्य क्या है?”

गुप्ता के कार्यकाल में वसूली का नेटवर्क

बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि अनुराग गुप्ता ने मुख्यमंत्री के संरक्षण में वसूली के लिए कई विवादास्पद लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर बहाल किया था। इनमें इंस्पेक्टर गणेश सिंह, सिपाही रंजीत राणा, बिचौलिया मनोज गुप्ता और हरियाणा का किशन जी शामिल हैं। मरांडी ने कहा कि ये लोग इतने ताकतवर हो गए कि इनके खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

शराब घोटाला, कफ सिरप और अपराधियों को संरक्षण

बाबूलाल मरांडी ने कहा शराब घोटाले में मुख्यमंत्री को पहले ही चेतावनी दी थी, लेकिन अनसुना कर दिया गया। बाद में CBI ने छत्तीसगढ़ के बाद झारखंड में छापे मारे और IAS विनय चौबे गिरफ्तार हुए। उन्होंने कहा सरकार ने जानबूझकर 90 दिन तक चार्जशीट दाखिल नहीं की ताकि आरोपी जमानत ले सकें। बाबूलाल ने अवैध कफ सिरप के धंधे को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि गुजरात पुलिस की कार्रवाई के दौरान अनुराग गुप्ता ने अपराधियों को बचाने के लिए CID जांच के बहाने फोन किया। साथ ही उन्होंने कहा कि कुख्यात अपराधी सुजीत सिन्हा को पलामू जेल में रखवाया, राजेश राम जैसे अपराधियों की मीटिंग डीजीपी की गोपनीय शाखा में होती थी।

दस्तावेज गायब और दिल्ली-हरियाणा से धमकी

मरांडी ने आरोप लगाया कि जब अनुराग गुप्ता को CID और SIT के डीजी पद से हटाया गया तो उन्होंने रातों-रात ऑफिस से महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब कर दिए, पेन ड्राइव में सेव किए और मुख्यमंत्री को ब्लैकमेल करने की धमकी दे रहे हैं। सूचना है कि अभी भी दिल्ली और हरियाणा से वे मुख्यमंत्री को धमका रहे हैं।

जांच न होने का मतलब – हिस्सेदारी!

बाबूलाल मरांडी ने सबसे बड़ा सवाल उठाया, “इतने गंभीर आरोपों के बावजूद आज तक अनुराग गुप्ता के कार्यकाल की कोई जांच क्यों नहीं हुई? इसका सीधा मतलब है कि अवैध कमाई में हिस्सेदारी का मामला है। इस्तीफा इसलिए लिया गया क्योंकि शायद हिस्सा नहीं मिला।”

मुफ्त सलाह: सलाहकार बना लें!

व्यंग्य करते हुए मरांडी ने कहा, “मुख्यमंत्री को मुफ्त सलाह है अनुराग गुप्ता को अपना सलाहकार बना लें, ताकि भस्मासुर से बच सकें और सुरक्षित रहें।” प्रेसवार्ता में भाजपा के सह मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह और प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव भी मौजूद रहे।

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