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भाकपा राज्य सचिव महेंद्र पाठक ने सीएम हेमंत सोरेन को लिखा पत्र: भूमि बैंक रद्द करने और गैर मजरूआ जमीन की रसीद चालू करने की मांग

रांची : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के झारखंड राज्य सचिव महेंद्र पाठक ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर पूर्व भाजपा सरकार द्वारा गठित भूमि बैंक को तत्काल रद्द करने की मांग की है। उन्होंने घोषणा पत्र में किए गए वादों को पूरा करने तथा गैर मजरूआ जमीन की रसीदें अबिलंब चालू करने पर जोर दिया है।

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पाठक ने पत्र में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन के प्रसिद्ध उद्घोष का हवाला देते हुए कहा कि “जो जमीन को जोतेगा, वही मालिक कहलाएगा”। उन्होंने सीएनटी-एसपीटी एक्ट के कोड राइट प्रावधानों का भी उल्लेख किया, जो आदिवासी और किसानों के भूमि अधिकारों की रक्षा करता है।

पाठक ने आरोप लगाया कि पूर्व रघुवर दास सरकार ने बड़े-बड़े पूंजीपतियों के हित साधने के लिए भूमि बैंक का गठन किया, जिसके तहत 23 लाख हेक्टेयर गैर मजरूआ जमीन के किसानों से दस्तावेज छीन लिए गए और रसीदें बंद कर दी गईं। इससे किसानों का जीना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार के गठन के 5 साल 11 महीने बीत चुके हैं, लेकिन घोषणा पत्र में किए गए वादे के बावजूद भूमि बैंक को रद्द नहीं किया गया।

पत्र में पाठक ने आगे कहा कि कॉर्पोरेट घराने किसानों को जमीन का उचित मुआवजा नहीं दे रहे हैं। कोडरमा में डैमोदर वैली कॉर्पोरेशन (डीवीसी) द्वारा भूमि अधिग्रहण के दौरान रैयती भूमि की तरह गैर मजरूआ जमीन के किसानों को मुआवजा मिला था, लेकिन वर्तमान में गैर मजरूआ जमीन की रसीद बंद होने के कारण पूरे झारखंड में किसान आंदोलनरत हैं।

भाकपा नेता ने मांग की है कि भूमि बैंक को तुरंत रद्द किया जाए, गैर मजरूआ जमीन की रसीदें चालू की जाएं और घोषणा पत्र में उल्लिखित सभी मांगों को अबिलंब पूरा किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो किसान आंदोलन और तेज होगा।

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