Dhanbad: Waiting for justice even after 63 hours

धनबाद : 63 घंटे बाद भी न्याय का इंतजार: विक्रम के परिवार के समर्थन में उठी आवाज, मुआवजा-नौकरी और पुनर्वास की मांग

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धनबाद/कतरास। सिजुआ क्षेत्र में हुए दर्दनाक भू-धंसान हादसे में मासूम विक्रम की मौत के बाद प्रभावित परिवारों की मुश्किलें अब भी बनी हुई हैं। हादसे के 63 घंटे बाद भी मुआवजा, पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा को लेकर प्रभावित परिवार धरने पर बैठे हैं। इस बीच अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के धनबाद जिलाध्यक्ष रत्नेश कुमार ने मामले को गंभीरता से उठाते हुए धनबाद उपायुक्त को लिखित आवेदन सौंपकर पीड़ित परिवारों के लिए ठोस राहत और न्याय की मांग की है।

प्रभावित परिवारों को मुआवजा और सुरक्षित पुनर्वास की मांग

उपायुक्त को दिए आवेदन में कहा गया है कि भू-धंसान की घटना में कई परिवारों के घर प्रभावित हुए हैं, जबकि एक बच्चे की मलबे में दबने से मौत हुई है। घटना के बाद इलाके में मातम और भय का माहौल है।

आवेदन में कहा गया है कि बाघमारा विधानसभा क्षेत्र में पहले भी भू-धंसान की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में इस घटना की गंभीरता से जांच कराने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी कदम उठाने की जरूरत है।

रत्नेश कुमार ने प्रशासन से मांग की है कि भू-धंसान से प्रभावित प्रत्येक परिवार को उचित एवं पर्याप्त मुआवजा दिया जाए। हादसे में मृत विक्रम के आश्रित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी की गई है। इसके अलावा प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित करने की मांग रखी गई है।

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अवैध खनन की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

आवेदन में घटना की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही क्षेत्र में संभावित अवैध खनन की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने तथा भू-धंसान की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों का सर्वे कराने की मांग की गई है।

रत्नेश कुमार का कहना है कि केवल मुआवजा देना पर्याप्त नहीं है। प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और उनके भविष्य को देखते हुए स्थायी पुनर्वास और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना जरूरी है।

सोशल मीडिया के जरिए PMO और मुख्यमंत्री तक पहुंचाई बात

रत्नेश कुमार ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, धनबाद उपायुक्त और विधायक रागिनी सिंह को टैग करते हुए भी पीड़ित परिवारों की स्थिति सामने रखी है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से व्यक्तिगत स्तर पर पहल कर प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, नौकरी और पुनर्वास उपलब्ध कराने की अपील की है।

 

हादसे के बाद प्रभावित परिवारों का धरना जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत देने के साथ-साथ भू-धंसान की समस्या का स्थायी समाधान तलाशना जरूरी है।

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