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दुमका सीट हेमंत के लिए नाक की लड़ाई

दुमका ब्यूरो सौरभ सिन्हा

झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए दुमका सीट नाक की लड़ाई बन गई है दरअसल पहले तो दुमका सीट पर मुख्यमंत्री के छोटे भाई बसंत सोरेन चुनावी मैदान में है तो वहीं दूसरी तरफ बीते 10 माह का हेमंत सोरेन का कार्यकलाप जनता के हाथों परखी जाएगी अगर बसंत सोरेन यहां से चुनाव जीते हैं तो सरकार के साथ तो बचेंगे ही हेमंत सोरेन के काम पर ठप्पा भी लग जाएगा वही अगर बसंत चुनाव हार जाते हैं तो बाबूलाल मरांडी की साख बढ़ जाएगी. वैसे आज झामुमो प्रत्यासी बसंत सोरेन के नामांकन का पर्चा भरने के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ ही उनके मंत्रिमंडल के कई सहयोगियों के अलावा झामुमो के कई विधायक और पार्टी के प्रमुख नेता दुमका में मौजूद थे।

आपको बता दें दुमका सीट पर हो रहा उपचुनाव मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो के लिए प्रतिष्ठा वाली सीट बन गयी है। इसके दो कारण है पहला तो यह सीट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा खाली की हुई सीट है और दूसरा की सीएम के भाई बसंत सोरेन इस सीट से चुनाव लड़ने जा रहे है।

दुमका विधानसभा सीट से झामुमो प्रत्यासी बसंत सोरेन ने सोमवार को दो सेट में नामांकन दाखिल किया। नामांकन से पूर्व उन्होंने मांझी थान में पूजा अर्चना भी की। इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ मंत्री बादल पत्रलेख, आलमगीर आलम, और सत्यानंद भोक्ता भी दुमका पहुंचे। बसंत सोरेन झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के छोटे बेटे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के छोटे भाई है।

3 नवंबर को होगा उपचुनाव
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा खाली करने के कारण ही दुमका सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है। 2019 के विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन दुमका और बरहेट दोनो सीटों से चुनाव जीते थे। दो सीट जीतने के कारण उन्होंने एक सीट (दुमका) छोड़ दी थी।

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