Hemant Soren lashes out over the Minerals Bill.

वार्ता होल्ड होते ही बढ़ी हलचल, क्या छात्रों की मांगों पर बड़ा फैसला लेने जा रही हेमंत सरकार?

Hemant Soren lashes out over the Minerals Bill.

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रांची: झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और हेमंत सरकार के बीच होने वाली उच्चस्तरीय वार्ता अचानक होल्ड कर दी गई है। वार्ता स्थगित होने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर आखिरी वक्त पर वार्ता क्यों रोकी गई और क्या सरकार छात्रों की मांगों को लेकर कोई बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है?

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आंदोलनकारी छात्रों का प्रतिनिधिमंडल सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई गाड़ियों से राज्य अतिथि गृह के लिए रवाना होने वाला था। इसी दौरान वार्ता को फिलहाल रोकने का संदेश मिला। इसके बाद न तो सरकारी प्रतिनिधिमंडल और न ही छात्रों का प्रतिनिधिमंडल वार्ता स्थल पर पहुंचा।

आखिर अचानक क्यों रोकी गई वार्ता?

वार्ता स्थगित किए जाने के पीछे की वजह को लेकर फिलहाल सरकार की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। यही वजह है कि इस घटनाक्रम को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सरकार छात्रों की प्रमुख मांगों पर आपसी सहमति बनाने या कोई ठोस प्रस्ताव तैयार करने पर विचार कर सकती है। हालांकि, जब तक सरकार की ओर से आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आता, तब तक इसे केवल संभावना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री के साथ मंत्रियों की बैठक पर नजर

इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ मंत्रियों की प्रस्तावित उच्चस्तरीय बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जानकारी के अनुसार, शाम करीब 4:30 बजे होने वाली बैठक में JPSC-JSSC से जुड़े मुद्दों के अलावा राज्य के कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हो सकती है।

ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या छात्रों की मांगों को लेकर सरकार इस बैठक में कोई राजनीतिक या प्रशासनिक निर्णय ले सकती है। यदि बैठक के बाद सरकार की ओर से कोई सकारात्मक घोषणा होती है, तो लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों के लिए यह बड़ा घटनाक्रम हो सकता है।

20 अगस्त को छात्र करेंगे मुख्यमंत्री आवास का घेराव

छात्रों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस और संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया, तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। ऐसे में सरकार के सामने आंदोलन को शांत करने और छात्रों के साथ संवाद के जरिए समाधान निकालने की चुनौती बनी हुई है।

आज की वार्ता का अचानक रुकना इसी वजह से और भी महत्वपूर्ण हो गया है। अगर सरकार छात्रों की मांगों पर कोई बड़ा फैसला लेती है, तो 20 अगस्त का प्रस्तावित आंदोलन भी प्रभावित हो सकता है। वहीं, यदि कोई ठोस निर्णय नहीं होता है तो आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

20 अगस्त को JMM की भी बड़ी बैठक

दिलचस्प बात यह है कि 20 अगस्त को ही झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की बड़ी बैठक रांची में बुलाई है। इस बैठक में केंद्र सरकार द्वारा खनन मामलों से जुड़े पारित विधेयक के विरोध में आगे की रणनीति पर चर्चा की जानी है।

यानी आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में दो महत्वपूर्ण घटनाक्रम एक ही दिन सामने आ सकते हैं—एक तरफ छात्र मुख्यमंत्री आवास के घेराव की तैयारी कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ JMM अपने राजनीतिक आंदोलन की रणनीति तैयार करेगा।

अब बड़ा सवाल—क्या होने वाला है बड़ा फैसला?

वार्ता का अचानक होल्ड होना, मुख्यमंत्री के साथ मंत्रियों की बैठक और 20 अगस्त के प्रस्तावित छात्र आंदोलन ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि सरकार छात्रों की सभी मांगें मानने जा रही है, लेकिन घटनाक्रम से इतना जरूर संकेत मिल रहा है कि सरकार इस मुद्दे को हल्के में नहीं ले रही है।

अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री और मंत्रियों की बैठक के बाद सरकार के रुख पर टिकी हैं। क्या छात्रों की मांगों पर कोई बड़ा ऐलान होगा? क्या वार्ता के लिए नया समय तय किया जाएगा? या फिर 20 अगस्त को आंदोलन और राजनीतिक टकराव का रास्ता खुलेगा—इन सवालों के जवाब आने वाले कुछ घंटों में तस्वीर साफ कर सकते हैं।

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