JPSC Chairman L. Khiangte resigns.

JPSC और  विवाद चोली दमन का साथ ,आखिर कब  लौटा पायेगा JPSC अपनी साख  

 

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

JPSC Chairman L. Khiangte resigns.नवीन कुमार 

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) वर्तमान में अपने इतिहास के सबसे गंभीर और गहरे दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां आयोग के शुरुआती इतिहास से जुड़े पुराने मामलों पर सीबीआई की जांच का शिकंजा कसा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ हाल ही में आयोजित की गई नई परीक्षाएं भी विवादों के साए में घिर चुकी हैं। लगातार उठ रहे इन गंभीर सवालों ने जेपीएससी की पारदर्शिता, निष्पक्षता और इसकी कार्यप्रणाली पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिससे राज्य के युवाओं और अभ्यर्थियों में निराशा और असंतोष चरम पर है।

जांच के दायरे में पुराना इतिहास और नए विवाद

पिछले दो दशकों में जेपीएससी द्वारा आयोजित लगभग 11 बड़ी नियुक्तियां कानूनी और प्रशासनिक जांच के घेरे में आ चुकी हैं। शुरुआती मामलों में मेरिट लिस्ट में बड़े पैमाने पर फेरबदल, उत्तर पुस्तिकाओं के साथ छेड़छाड़, ओएमआर शीट में गड़बड़ी और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुँचाने जैसे गंभीर आरोप सामने आए थे।

झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा बुद्धदेव उरांव व अन्य जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। हालांकि, न्याय मिलने की इस लंबी प्रक्रिया का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहली और दूसरी सिविल सेवा परीक्षाओं की जांच शुरू होने के करीब 12 साल बाद सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की, जिसमें तत्कालीन अध्यक्ष, परीक्षा नियंत्रक और सदस्यों सहित 37 लोगों को आरोपी बनाया गया।

नई परीक्षाओं पर भी उठ रहे हैं गंभीर सवाल

पुरानी गड़बड़ियों के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि हाल ही में संपन्न हुई कई नई परीक्षाओं ने आयोग की कार्यप्रणाली पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन प्रमुख परीक्षाओं पर वर्तमान में विवाद गहराया हुआ है, उनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

झारखंड स्वास्थ्य सेवा संयुक्त नियुक्ति परीक्षा (बेसिक) (04/2023)
झारखंड वन क्षेत्र पदाधिकारी नियुक्ति परीक्षा (बेसिक) (04/2024)
झारखंड संयुक्त असैनिक प्रतियोगिता परीक्षा (01/2026)
झारखंड संयुक्त असैनिक प्रतियोगिता परीक्षा (05/2026)

खामियां और बढ़ती चिंताएं

अभ्यर्थियों और विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा उठाई जा रही आपत्तियों के अनुसार, पूरी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव साफ नजर आ रहा है। प्रमुख चिंता इस बात की है कि

एक ही एजेंसी के पास संपूर्ण नियंत्रण: वन-टाइम रजिस्ट्रेशन, ऑनलाइन आवेदन, एडमिट कार्ड, प्रश्नपत्र प्रिंटिंग, ओएमआर स्कैनिंग, ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) और रिजल्ट प्रोसेसिंग जैसी पूरी परीक्षा श्रृंखला का एक ही निजी एजेंसी के नियंत्रण में होना संदेह पैदा करता है।

विवादित पृष्ठभूमि की एजेंसी: जिस एजेंसी को इतनी संवेदनशील जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसका नाम पहले भी उत्तर प्रदेश की कुछ प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों में आ चुका है। इसके चलते एजेंसी के तकनीकी ऑडिट और चयन प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग जोर पकड़ रही है।

पारदर्शिता का अभाव: परीक्षाओं के कट-ऑफ मार्क्स को सार्वजनिक न किया जाना और परिणामों पर जिम्मेदार सदस्यों के हस्ताक्षर न होने जैसी बातें प्रणाली की विश्वसनीयता को और कमजोर करती हैं।

रसूखदारों का दखल: सोशल मीडिया और छात्र समूहों के बीच लगातार यह चर्चा आम है कि वरिष्ठ अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों के करीबी व रिश्तेदार चयन सूची में जगह बना रहे हैं, जिससे आम और योग्य अभ्यर्थियों का मनोबल टूट रहा है।

जेपीएससी केवल एक परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था मात्र नहीं है, बल्कि यह झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य और उम्मीदों का केंद्र है। जब तक इस पूरे सिस्टम की एक निष्पक्ष, पारदर्शी और तकनीकी ऑडिट के जरिए पूरी तरह से सफाई नहीं होती और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक आयोग पर से भरोसे का यह संकट टलना असंभव है।

नई और ताज़ा खबरों के लिए जुड़े रहें — Drishti Now