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बोकारो में कथारा वाशरी का स्लरी पॉन्ड टूटा: हजारों टन कीमती कोयला दामोदर में बहा, जलीय जीवों पर संकट; CCL प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल

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बोकारो: सीसीएल (CCL) कथारा वाशरी प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण एक बार फिर बड़ा पर्यावरणीय हादसा सामने आया है। वाशरी के कोल स्लरी पॉन्ड का तटबंध अचानक टूटने से करीब 50 हजार टन नंबर-वन क्वालिटी की कीमती कोल स्लरी बहकर सीधे दामोदर नदी में समा गई। तटबंध टूटने से तेज बहाव के साथ स्लरी नदी में मिलने के कारण दामोदर का पानी पूरी तरह काला पड़ चुका है, जिससे न सिर्फ जल प्रदूषण चरम पर पहुंच गया है बल्कि जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी गंभीर खतरा मंडराने लगा है।

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सरहचिया बस्ती में हड़कंप, खेतों में घुसा जहरीला पानी

घटना की भनक निकटवर्ती सरहचिया बस्ती के ग्रामीणों को तब लगी, जब उन्होंने सुबह दामोदर नदी की जलधारा को असामान्य रूप से एकदम काला देखा। देखते ही देखते पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय किसानों ने चिंता जताते हुए कहा कि नदी के किनारे स्थित कृषि योग्य खेतों में स्लरी युक्त दूषित पानी भर गया है। इससे लहलहाती फसलों के पूरी तरह बर्बाद होने की आशंका बन गई है। पानी इतना दूषित हो चुका है कि नदी में मौजूद मछलियां और अन्य जलीय जीव दम तोड़ने की कगार पर हैं।

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हर साल टूटता है कच्चा तटबंध, सीसीएल को करोड़ों की चपत

स्थानीय लोगों में प्रबंधन के खिलाफ भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई अचानक हुई दुर्घटना नहीं बल्कि सीसीएल की नियमित लापरवाही का नतीजा है। हर साल जलस्तर और दबाव बढ़ते ही पॉन्ड का कच्चा तटबंध टूट जाता है। इस हादसे से जहां एक ओर दामोदर नदी का पारिस्थतिक तंत्र (Ecosystem) तबाह हो रहा है और किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर सीसीएल को भी करोड़ों रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान हुआ है।

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प्रबंधन का पक्ष:

“कोल स्लरी पॉन्ड का तटबंध टूटने की सूचना मिलते ही उसे दुरुस्त कराने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। जल्द ही तटबंध का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। सीसीएल प्रबंधन इस घटना को काफी गंभीरता से ले रहा है और तटबंध टूटने के कारणों की उच्चस्तरीय जांच कराई जा रही है।”
— अमरेंद्र कुमार, परियोजना पदाधिकारी (PO), कथारा वाशरी

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दृष्टि नाउ का सवाल:

बार-बार तटबंध टूटने की घटनाओं के बावजूद सीसीएल प्रबंधन द्वारा पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जाते? करोड़ों रुपये मूल्य की स्लरी बहने और दामोदर नदी को प्रदूषित करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर आखिरकार कब तक ठोस कार्रवाई होगी?

 

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