Learning to read the Kaithi script will become easier; the government has released a special textbook.

झारखंड के करोड़ों रैयतों के लिए बड़ी पहल: अब कैथी लिपि पढ़ना होगा आसान, सरकार ने जारी की विशेष पाठ्यपुस्तिका

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Learning to read the Kaithi script will become easier; the government has released a special textbook.

नवीन कुमार 

रांची: झारखंड सरकार ने राज्य के पुराने भू-अभिलेखों को पढ़ने और समझने में आ रही वर्षों पुरानी समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने “कैथी लिपि पाठ्य पुस्तिका” तैयार की है, जिससे कैथी लिपि में लिखे पुराने खतियान, विलेख, बंदोबस्ती रिकॉर्ड और अन्य भू-दस्तावेजों को आसानी से पढ़ा और समझा जा सके।

राज्य सरकार का मानना है कि झारखंड के रांची, जमशेदपुर, धनबाद, हजारीबाग, दुमका और पलामू बंदोबस्ती कार्यालयों में मौजूद बड़ी संख्या में पुराने भू-अभिलेख कैथी लिपि में लिखे गए हैं। समय के साथ इस लिपि का सामान्य उपयोग लगभग समाप्त हो गया और इसे पढ़ने-समझने वाले लोगों की संख्या भी बेहद कम रह गई। इसका असर जमीन विवादों के निपटारे, खतियान की जांच और राजस्व संबंधी कार्यों पर पड़ने लगा। इसी चुनौती को देखते हुए विभाग ने यह पाठ्यपुस्तिका प्रकाशित की है।

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आखिर क्यों जरूरी पड़ी यह किताब?

भूमि से जुड़े मामलों में आज भी कई पुराने खतियान, बंदोबस्ती रिकॉर्ड और विलेख कैथी लिपि में उपलब्ध हैं। जब कोई रैयत अपनी पैतृक जमीन का रिकॉर्ड निकलवाता है तो अक्सर उसे यह समझने में कठिनाई होती है कि दस्तावेज में लिखा क्या है। कई बार अधिकारियों और कर्मचारियों को भी विशेषज्ञों की मदद लेनी पड़ती है। सरकार का मानना है कि यह पुस्तिका इस समस्या को काफी हद तक दूर करेगी।

तीन क्षेत्रों की अलग-अलग कैथी लिपि शामिल

पुस्तिका की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल एक प्रकार की कैथी लिपि नहीं, बल्कि रांची, पलामू और सिंहभूम क्षेत्र में प्रचलित कैथी लिपि के अलग-अलग स्वर, व्यंजन और शब्दों को शामिल किया गया है। इससे अलग-अलग जिलों के पुराने अभिलेखों को समझना आसान होगा।

अभ्यास के साथ हिंदी अनुवाद भी

पाठ्यपुस्तिका में कैथी और देवनागरी अक्षरों का तुलनात्मक चार्ट दिया गया है। इसके अलावा दो और तीन अक्षरों वाले सामान्य शब्द, राजस्व विभाग में प्रयुक्त शब्दावली, पुराने दस्तावेजों के नमूने तथा उनका हिंदी अनुवाद भी शामिल किया गया है। इससे कर्मचारी, विद्यार्थी, शोधकर्ता और आम नागरिक कैथी लिपि को व्यवहारिक रूप से सीख सकेंगे।

सरकार का क्या कहना है?

राजस्व मंत्री दीपक बिरुआ ने अपने संदेश में कहा है कि कैथी लिपि में लिखे पुराने भू-दस्तावेजों को पढ़ने में आम रैयतों और राजस्व कर्मियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को दूर करने के लिए वर्णमाला और शब्दावली का संकलन कर यह पाठ्यपुस्तिका तैयार की गई है, जिससे नागरिकों और राजस्व अधिकारियों दोनों को लाभ मिलेगा।

वहीं विभागीय सचिव ने कहा है कि भूमि हस्तांतरण, स्वामित्व और विवादों के समाधान में पुराने भू-अभिलेखों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए इन अभिलेखों को समझना आसान बनाने के उद्देश्य से यह पुस्तिका तैयार की गई है।

क्या होगा फायदा?

पुराने खतियान और भू-अभिलेख पढ़ना आसान होगा।

जमीन विवादों के निपटारे में सुविधा मिलेगी।

राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रशिक्षण आसान होगा।

आम रैयत अपने पैतृक दस्तावेजों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।

कैथी जैसी ऐतिहासिक लिपि के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

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