Saraswati Shishu Vidya Mandir Saldega reverberated with the sound of slogans, the grand inauguration of the provincial training class

घोष की गूंज से गुंजायमान हुआ सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा, प्रांतीय प्रशिक्षण वर्ग का भव्य शुभारंभ

Saraswati Shishu Vidya Mandir Saldega reverberated with the sound of slogans, the grand inauguration of the provincial training class
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शंभू कुमार सिंह 

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सिमडेगा : वनवासी कल्याण केंद्र झारखंड की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड के तत्वावधान में सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा में आयोजित प्रांतीय घोष प्रशिक्षण वर्ग का गुरुवार को भव्य शुभारंभ हुआ। 5 जून से 10 जून तक चलने वाले इस प्रशिक्षण वर्ग में राज्य के विभिन्न जिलों से आए 155 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 134 भैया-बहन तथा 21 आचार्य-आचार्या शामिल हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती, भारत माता एवं ओम् के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पार्चन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड के मंत्री शिवेंद्र लाल माणिक ने कहा कि प्रशिक्षण वर्ग केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम है। यहां प्राप्त प्रशिक्षण जीवनभर साधकों का मार्गदर्शन करता है।

इस अवसर पर प्रांत शिक्षा प्रमुख सुभाषचंद्र दुबे, कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध साहू, अजय नंदन, घोष प्रशिक्षक मनोज पाठक, सूरज, नंदलाल सारंगी, जिला निरीक्षक हीरालाल महतो, संकुल प्रमुख संतोष दास, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हनुमान बोंदिया, सहसचिव रामकृष्ण महतो, कोषाध्यक्ष संजीत कुमार तथा सदस्य मुरारी प्रसाद समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

उद्घाटन समारोह में छात्राओं द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत और सांस्कृतिक नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम में आगंतुक अतिथियों का परिचय प्रांत शिक्षा प्रमुख सुभाषचंद्र दुबे ने कराया, जबकि मंच संचालन विद्यालय के आचार्य आशीष बड़ाईक ने किया।

अपने संबोधन में अनिरुद्ध साहू ने घोष की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि घोष भारतीय संस्कृति और संगठनात्मक परंपरा का अभिन्न अंग है। यह केवल वाद्य यंत्रों का समूह नहीं, बल्कि अनुशासन, एकता और राष्ट्रभावना का सशक्त माध्यम है। घोष से उत्पन्न जयघोष समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रशिक्षण वर्ग के शुभारंभ की पूर्व संध्या पर विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस दौरान प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश दिया गया।

प्रशिक्षण वर्ग में अनुभवी प्रशिक्षक मनोज पाठक, नंदलाल सारंगी और सूरज द्वारा प्रतिभागियों को बांसुरी, बिगुल तथा अन्य घोष वाद्य यंत्रों के संचालन और वादन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को घोष के सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों पहलुओं से परिचित कराया जा रहा है।

10 जून तक चलने वाले इस प्रशिक्षण वर्ग का उद्देश्य घोष परंपरा को सशक्त बनाना, विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रभक्ति की भावना का विकास करना तथा संगठनात्मक कार्यों के लिए दक्ष कार्यकर्ताओं का निर्माण करना है।

इन दिनों पूरा विद्यालय परिसर घोष की मधुर ध्वनियों, अनुशासित गतिविधियों और राष्ट्रभावना से ओतप्रोत वातावरण से गुंजायमान है। आयोजकों के अनुसार यह प्रशिक्षण वर्ग प्रतिभागियों के व्यक्तित्व निर्माण और सांस्कृतिक चेतना के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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