The Impact of High Petrol and Diesel Prices: The Growing EV Market

पेट्रोल-डीजल की मार EV का बढ़ता बाजार, झारखंड में तेजी से बढ़ती EV की मांग लेकिन सामने कई चुनौतियां

The Impact of High Petrol and Diesel Prices: The Growing EV Market

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नवीन कुमार

रांची: पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन आपूर्ति में आ रहे उतार-चढ़ाव ने आम आदमी की जेब पर भारी बोझ डाल दिया है। इस आर्थिक संकट के बीच, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अब केवल एक आधुनिक शौक नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जरूरत बनकर उभरे हैं। झारखंड की राजधानी रांची सहित पूरे राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

क्यों बदल रहा है लोगों का नजरिया?

जानकारों का मानना है कि EV की लोकप्रियता के पीछे तीन सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं:
1. कम रनिंग कॉस्ट: पेट्रोल की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रति किलोमीटर खर्च नगण्य है। यह महंगाई के दौर में मध्यम वर्ग के लिए सबसे बड़ी राहत है।
2. पर्यावरण के प्रति सजगता: झारखंड के प्रमुख शहरों में बढ़ते प्रदूषण के बीच, युवा पीढ़ी अब पर्यावरण-अनुकूल साधनों को प्राथमिकता दे रही है।
3. सरकारी प्रोत्साहन: राज्य सरकार की EV नीति और केंद्र की FAME जैसी योजनाओं के तहत मिल रही सब्सिडी ने खरीददारों के लिए राह आसान कर दी है।

रांची के कई शोरूमों में तो स्थिति यह है कि लोकप्रिय इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक्स की भारी मांग के कारण वे ‘आउट ऑफ स्टॉक’ हो चुके हैं। 2022 के बाद से राज्य में EV रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों में आई उछाल इस बदलाव की गवाही देती है।

बाधा: अधूरा इंफ्रास्ट्रक्चर

हालांकि, गाड़ियों की बिक्री तो तेजी से बढ़ रही है, लेकिन EV का वास्तविक भविष्य सुरक्षित करने के लिए जरूरी ‘चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर’ अभी भी दम तोड़ रहा है। वर्तमान में राज्य की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है:

सीमित केंद्र: राज्य के मात्र 26 पेट्रोल पंपों पर ही चार्जिंग सुविधा उपलब्ध है, जिनमें से भी कई मशीनें तकनीकी खराबी के कारण बेकार पड़ी हैं।

बिजली का संकट: रांची जैसे शहरों में भी बार-बार होने वाले पावर कट EV उपयोगकर्ताओं के लिए सिरदर्द बने हुए हैं।

रखरखाव का अभाव: मॉल, सार्वजनिक पार्किंग और हाईवे पर पर्याप्त फास्ट-चार्जर की कमी ने लंबी दूरी की यात्रा को जोखिम भरा बना दिया है।

क्या झारखंड बन सकता है EV हब?

झारखंड के पास ऊर्जा संसाधन और खनिज संपदा का भंडार है, जो इसे EV हब बनाने के लिए एक आदर्श जगह बनाता है। यदि सही दिशा में कदम उठाए जाएं, तो अगले 5-10 वर्षों में झारखंड देश के अग्रणी EV बाजारों में शामिल हो सकता है।

EV हब बनने के लिए जरूरी कदम:

हाईवे EV कॉरिडोर: प्रमुख शहरों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर फास्ट-चार्जिंग नेटवर्क का जाल बिछाना।

निजी निवेश को बढ़ावा: DISCOM की अनुमति और जमीन आवंटन जैसी प्रक्रियाओं को सरल बनाकर निजी कंपनियों को आकर्षित करना।

24×7 पावर बैकअप: चार्जिंग स्टेशनों के लिए समर्पित बिजली फीडर और स्मार्ट ग्रिड तकनीक का उपयोग।

बैटरी स्वैपिंग स्टेशन: खासकर ई-रिक्शा और टू-व्हीलर सेगमेंट के लिए ‘बैटरी स्वैपिंग’ तकनीक पर जोर देना, जिससे चार्जिंग के लंबे इंतजार से बचा जा सके।

जाहिर है की पेट्रोल-डीजल का संकट स्पष्ट संकेत दे रहा है कि आने वाला दौर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का है। यदि केंद्र और राज्य सरकारें निजी क्षेत्र के साथ मिलकर चार्जिंग नेटवर्क, विश्वसनीय बिजली आपूर्ति और बेहतर सड़क बुनियादी ढांचे पर काम करती हैं, तो झारखंड न केवल ईंधन पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि एक आत्मनिर्भर और ‘ग्रीन’ राज्य के रूप में अपनी पहचान बना सकेगा।

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