सामाजिक न्याय, शिक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं पर बोले केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, युवाओं से आंबेडकर के विचार अपनाने का आह्वान

रांची : केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने शनिवार को रांची स्थित राजकीय अतिथि गृह में झारखंड सरकार के समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने सामाजिक न्याय, शिक्षा, भारतीय संविधान और केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार विकास और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!अठावले ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित भारतीय संविधान देश की एकता और अखंडता का मजबूत आधार है। उन्होंने भगवान बुद्ध के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में जन्मा बौद्ध धर्म आज पूरी दुनिया में शांति, समानता और मानवता का संदेश दे रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार के प्रयासों से करीब 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। उन्होंने बताया कि लगभग तीन करोड़ महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, जबकि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 58 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिला है। साथ ही देश ने लगभग 79 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड निर्यात और रक्षा निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। सड़क, रेल और हवाई संपर्क के विस्तार से विकास को नई गति मिली है।
झारखंड में केंद्र सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए अठावले ने कहा कि प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत राज्य में लगभग 2.56 करोड़ खाते खोले गए हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से करीब 1.73 करोड़ लोग लाभान्वित हुए हैं, जबकि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत लगभग 39.82 लाख परिवारों को गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है।
इससे पहले केंद्रीय राज्य मंत्री ने रामगढ़ स्थित राधा गोविंद विश्वविद्यालय में “आर्थिक असमानता एवं बेरोजगारी के संदर्भ में डॉ. भीमराव अंबेडकर का समग्र दृष्टिकोण” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर का सपना केवल सामाजिक समानता तक सीमित नहीं था, बल्कि वे आर्थिक न्याय, शिक्षा और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण चाहते थे। उन्होंने युवाओं से डॉ. अंबेडकर के विचारों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
















