सड़क-पुल के अभाव में परेशान ग्रामीणों का ऐलान, ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’

निर्मल सिंह
गुमला: गुमला जिले के पालकोट प्रखंड अंतर्गत बिलिंगबिरा पंचायत के केराटोली गोइंधारा गांव के ग्रामीण सड़क और पुल की समस्या से परेशान हैं। वर्षों से बुनियादी सुविधाओं की मांग पूरी नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने अब **‘रोड नहीं तो वोट नहीं’** का नारा देते हुए 2029 के चुनाव में मतदान बहिष्कार की चेतावनी दी है। ग्रामीणों ने मांग पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन, डीसी कार्यालय के घेराव और सड़क जाम करने की भी बात कही है।
ग्रामीणों ने इस समस्या की जानकारी युवा समाजसेवी कमल किशोर किसान को फोन पर दी थी। इसके बाद वे गांव पहुंचे और ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने बताया कि केराटोली मुख्य सड़क से करीब चार किलोमीटर अंदर स्थित गोइंधारा गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं है। कच्चा रास्ता होने के कारण बरसात के दिनों में आवागमन बेहद मुश्किल हो जाता है और वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते।
ग्रामीणों के अनुसार, रास्ते में चुटिया डूबा नदी पड़ती है, जिस पर अब तक पुल का निर्माण नहीं हुआ है। यही रास्ता पालकोट प्रखंड मुख्यालय जाने का प्रमुख माध्यम है। सड़क और पुल के अभाव में ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामों के साथ-साथ जरूरी आवागमन में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल निर्माण की मांग को लेकर कई बार अधिकारियों, विधायक और मंत्री को आवेदन दिया गया। पूर्व उपायुक्त सुशांत गौरव को भी लिखित आवेदन सौंपा गया था। ग्रामीणों के मुताबिक, विधायक भूषण बाड़ा ने गांव पहुंचकर पुल निर्माण का आश्वासन भी दिया था, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार, इस क्षेत्र में गोइंधारा, लौखमहल, जमझरिया, चरखा गोड़ी, बिलिंग सीरी और रायटोली समेत आसपास के गांवों के करीब 150 परिवार रहते हैं। सड़क और पुल नहीं होने से इन गांवों के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
लंबे समय से मांग पूरी नहीं होने पर ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी जताई। उनका कहना है कि चुनाव के समय विकास के वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों ने आगामी 2029 के चुनाव में वोट बहिष्कार का निर्णय लेने की बात कही है।
बैठक में बलदेव सिंह, केशर सिंह, निर्मल सिंह, कुलदीप सिंह, जयपाल सिंह, दीपनारायण सिंह, बालगोविंद सिंह, निरंजन सिंह, जय नारायण सिंह, परमेश्वर सिंह, दिलु खड़िया, श्याम सुंदर सिंह, बुद्धेश्वर सिंह, मोहन नाथ सिंह, प्रद्युम्न सिंह, नरेंद्र कुमार सिंह, रूकमणी देवी, कमला देवी, जानकी देवी, फूलमनी देवी, सरिता देवी, बालेश्वरी देवी समेत अन्य ग्रामीण मौजूद थे।

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