सरायकेला: चांडिल में करंट की चपेट में आने से जंगली हाथी की मौत, लचर बिजली व्यवस्था पर भड़के ग्रामीण
सरायकेला के चांडिल में बिजली के लटके तारों की चपेट में आने से एक जंगली नर हाथी की दर्दनाक मौत। ग्रामीणों में बिजली विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश, पिछले 3 सालों में कई हाथियों ने गंवाई जान। पूरी खबर पढ़ें।

नीरज तिवारी
सरायकेला-खरसावां: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल वन क्षेत्र में मानवीय लापरवाही एक बार फिर बेजुबान जंगली जानवर पर भारी पड़ी है। कुकड़ू प्रखंड के तिरूलडीह और सापारूम गांव के बीच देर रात करंट लगने से एक विशालकाय नर हाथी की मौत हो गई। बुधवार सुबह जब ग्रामीण अपने खेतों की ओर निकले, तो हाथी का शव देख उनके होश उड़ गए। हाथी के शरीर में बिजली के तार लिपटे हुए थे, जो घटना की भयावहता को साफ बयां कर रहे थे।
खेतों में बिछा ‘मौत का जाल’
घटना की सूचना मिलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में बिजली के तार काफी नीचे लटके हुए हैं, जिसकी शिकायत कई बार विभाग से की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसी लचर व्यवस्था के कारण जंगल से गुजर रहे हाथी बिजली के तारों की चपेट में आ गए।
वन विभाग की कार्रवाई
सूचना पाकर वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची। अधिकारियों ने बताया कि हाथी के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और नियमानुसार उसे पास के ही वन क्षेत्र में दफनाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि तार प्राकृतिक रूप से झुके हुए थे या किसी प्रकार की लापरवाही बरती गई थी।
लगातार हो रही मौतों से खड़े हुए सवाल
यह पहली बार नहीं है जब चांडिल और आसपास के क्षेत्रों में हाथियों की मौत करंट से हुई हो। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं:
नवंबर 2023:मुसाबनी वन क्षेत्र में एक साथ 5 हाथियों ने जान गंवाई थी।
चाकुलिया: महज 24 घंटे के भीतर दो हाथियों की करंट से मौत हुई थी।
झुंड के अन्य हाथियों पर खतरा बरकरार
ग्रामीणों ने बताया कि मृत हाथी एक बड़े झुंड का हिस्सा था। अब सबसे बड़ी चिंता यह है कि वह झुंड अभी भी इसी क्षेत्र के आसपास मौजूद है। यदि लटके हुए तारों को तुरंत दुरुस्त नहीं किया गया, तो झुंड के अन्य हाथी भी इस जानलेवा दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं।
हाथियों की मौत केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि बिजली विभाग की घोर लापरवाही है। जब तक तारों को ऊंचा नहीं किया जाता, इंसानों और जानवरों दोनों की जान खतरे में बनी रहेगी।” स्थानीय ग्रामीण
अब देखना यह होगा कि इस ताजा घटना के बाद वन विभाग और बिजली विभाग के बीच कोई समन्वय बनता है या फिर बेजुबान इसी तरह सिस्टम की भेंट चढ़ते रहेंगे।
















