JMM:-सियासी घमासान: जनसभा में सीएम सोरेन के बारे में निशिकांत की टिप्पणी से भड़का झामुमो.

JMM:-सियासी घमासान: जनसभा में सीएम सोरेन के बारे में निशिकांत की टिप्पणी से भड़का झामुमो.

Author drishtinow | Edited by drishtinow
Updated: Thu, 13 Apr 2023 11:21 AM (IST)

JMM

प्रेरणा चौरसिया

Drishti  Now  Ranchi

भाजपा के सचिवालय घेराव कार्यक्रम के दौरान गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे के बयान पर झामुमो ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। झामुमो के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि निशिकांत दुबे ने लोकतंत्र पर प्रहार करते हुए संवैधानिक संस्थाओं को बौना बनाने की धमकी दी। संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि 13 अप्रैल को लोकपाल के मामले में हेमंत सोरेन के परिवार को जेल में डाला जाएगा।

यह लोकपाल को जेब में रख कर फैसला सुनाने वाली मानसिकता है। निशिकांत ने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग पर दबाव डाल कर लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव कराएंगे। क्या जो निशिकांत चाहेंगे, वही निर्वाचन आयोग और लोकपाल करेंगे। भाजपा के बड़े नेता इसका जवाब दें, जनता को बताएं, नहीं तो हम उन्हें कानूनी रूप से घसीटेंगे।

उन्होंने सचिवालय घेराव के दौरान पुलिस पर पत्थर और बोतल फेंके जाने पर कहा कि राजनीतिक कार्यकर्ता कभी पत्थरबाज या बोतलबाज नहीं हो सकता। इतना ही नहीं, राजनीतिक कार्यक्रम में राजनीतिक नारे लगाने के बदले आपसी भाईचारा, सौहार्द्र बिगाड़ने तथा द्वेष, हिंसा व सांप्रदायिक उन्माद फैलाने की कोशिश की गई।

निशिकांत : मैंने कोई असंवैधानिक बात नहीं कही

भारत का संविधान हमें बोलने की इजाजत देता है। भारत का संविधान ही कहता है कि अगर छह महीने के भीतर कहीं चुनाव होना है, तो उसकी डेट क्या होगी। इसके लिए हम चुनाव आयोग से निवेदन करेंगे। हमने ऐसी कौन सी गलत बात कही है।

लोकपाल वाले मामले में हेमंत सोरेन परिवार के जेल जाने की बात कहे जाने के सवाल पर निशिकांत दुबे ने कहा कि 13 अप्रैल को हाईकोर्ट में सुनवाई की तारीख है। यही तो हमने कहा है और खुल कर कहा है। हमें लगता है कि उच्च न्यायालय भी मेरी बात को तरजीह देगा। सीबीआई ने इनके परिवार की 108 संपत्ति निकाल कर दी है।

बाबूलाल मरांडी ने इसको लेकर प्रेस कांफ्रेंस भी की थी। हमने इन दोनों विषयों पर कौन सा गलत बोला। संवैधानिक रूप से तो दोनों ही बातें सही हैं। इतना ही नहीं, लोकपाल के मुद्दे पर इन्होंने जो हलफनामा दिया है, उसमें उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि सीबीआई ने उनकी 108 संपत्ति निकाल कर दी है। यह हलफनामा भी मेरा नहीं, शिबू सोरेन जी का है।

 

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