राज्यसभा में हंगामे के बीच 'जी राम जी' बिल पारित, विपक्ष ने किया वॉकआउट

राज्यसभा में हंगामे के बीच ‘जी राम जी’ बिल पारित, विपक्ष ने किया वॉकआउट

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नई दिल्ली : संसद के शीतकालीन सत्र में देर रात तक चली करीब छह घंटे की तीखी चर्चा और हंगामे के बाद राज्यसभा ने ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025’ यानी ‘जी राम जी’ बिल को ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह बिल 20 साल पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेगा और ग्रामीण परिवारों को हर साल 125 दिनों की मजदूरी रोजगार की गारंटी देगा। लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी विपक्षी दलों ने बिल का कड़ा विरोध किया, नारेबाजी की और अंत में सदन से वॉकआउट कर दिया।

विपक्ष का जोरदार हंगामा और वॉकआउट

राज्यसभा में विपक्ष के नेता तथा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बिल पर बोलते हुए ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से अपील की, “चौहान जी, फिर एक बार सोचिए। समय है अभी कानून वापस लेने का। कई कानून सरकार ने वापस लिए हैं, जैसे तीन कृषि कानून। कोई धक्का नहीं लगा सरकार को। अगर आप इस कानून को वापस ले लें तो आप हीरो बन जाएंगे, मामा की जगह मामाजी बन जाएंगे। मौजूदा मनरेगा कानून गरीबों से संबंधित है, इससे छेड़छाड़ ठीक नहीं।”

खड़गे का भाषण खत्म होने के बाद जब मंत्री शिवराज सिंह चौहान बहस का जवाब देने खड़े हुए, तो विपक्षी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने ‘काला कानून वापस लो, वापस लो’ के नारे लगाए। नारेबाजी जारी रहने पर विपक्षी सदस्यों ने बिल वापस लेने की मांग करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। बिल पारित होने के बाद विपक्षी सांसद संसद परिसर में संविधान सदन के बाहर धरने पर भी बैठ गए।

शिवराज सिंह चौहान का पलटवार

नारेबाजी पर नाराज शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “मैंने ध्यान से सभी विपक्षी सांसदों की बात सुनी। लेकिन अपनी बात कहकर आरोप लगाकर भाग जाना, यह भी बापू के आदर्शों की हत्या है। जवाब नहीं सुनना यह भी हिंसा है। मैं उम्मीद करता था कि खड़गे जी आज थोड़ी गंभीरता से बोलेंगे। इनसे मिलकर कौन चलेगा… ये कांग्रेस जिसके साथ जाती है, वो डूब जाता है।”

बिल का बचाव करते हुए चौहान ने आगे कहा, “बापू हमारे आदर्श हैं, प्रेरणा हैं। महात्मा गांधी के सामाजिक विचारों को हमने इसमें शामिल करने का प्रयास किया है। कांग्रेस ने पहले मनरेगा में महात्मा गांधी का नाम नहीं जोड़ा था। 2009 के चुनाव आने पर वोट के लिए नाम जोड़ दिया।”

बिल की मुख्य बातें

* यह बिल मनरेगा की कमियों को दूर करने का दावा करता है।

* ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल मजदूरी के लिए 125 दिनों की गारंटी (मनरेगा में 100 दिन थे)।

* डिजिटल और बायोमेट्रिक आधारित नई व्यवस्था।

* केंद्र और राज्यों के बीच फंड शेयरिंग 60:40।

* विपक्ष का आरोप: गरीबों का अधिकार छीना जा रहा, गांधी जी का अपमान, राज्यों पर अतिरिक्त बोझ।

अब यह बिल राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। विपक्ष ने इसे ‘गरीब-विरोधी’ और ‘काला कानून’ करार देते हुए भविष्य में वापस लेने की चेतावनी दी है। संसद सत्र में इस बिल को लेकर दोनों सदनों में तीखा टकराव देखने को मिला।

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