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सुप्रीम कोर्ट में आई-पैक छापेमारी मामले पर तीखी बहस: तुषार मेहता ने कहा – “पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र नहीं, भीड़तंत्र हावी”

नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बीच आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) छापेमारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज गुरुवार को सुनवाई हुई। ईडी ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पर जांच में बाधा डालने, सबूत हटाने और चोरी का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की है।

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सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तीखी दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि यह मामला “बहुत गंभीर” है और पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र नहीं, बल्कि भीड़तंत्र (mobocracy) लोकतंत्र पर हावी हो गया है। मेहता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलिस फोर्स के साथ छापेमारी वाली जगह पर खुद पहुंचकर जांच में दखल दिया, सबूतों को हटाया (जिसे उन्होंने “चोरी” करार दिया) और केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों को रोकने की कोशिश की।

तुषार मेहता ने आगे कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है। पहले भी जब केंद्रीय एजेंसियां अपना वैधानिक काम कर रही होती हैं, तब मुख्यमंत्री खुद मौके पर पहुंच जाती हैं। उन्होंने कहा, “जब भीड़तंत्र लोकतंत्र पर हावी हो जाता है, तो यही होता है। इससे केंद्रीय एजेंसियां हतोत्साहित होती हैं और राज्य पुलिस ऐसे कामों में सहयोग करने लगती है।”

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलीलें दीं। उन्होंने ईडी के आरोपों को “बेबुनियाद” और “झूठ” बताया। सिब्बल ने कहा कि आई-पैक टीएमसी से जुड़ा है और इसमें पार्टी का संवेदनशील डेटा होता है, इसलिए मुख्यमंत्री को वहां पहुंचना उनका अधिकार और कर्तव्य था। उन्होंने छापेमारी की टाइमिंग पर भी सवाल उठाया और कहा कि ईडी ने 2 साल इंतजार करने के बाद चुनाव से ठीक पहले छापा मारा। सिब्बल ने यह भी तर्क दिया कि मामला पहले कोलकाता हाईकोर्ट में लंबित है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट में सीधे याचिका दाखिल करना उचित नहीं।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट (जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पांचोली की बेंच) ने ईडी की याचिका पर पश्चिम बंगाल सरकार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और डीजीपी राजीव कुमार को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही, 8 जनवरी को छापेमारी वाली जगहों के सीसीटीवी फुटेज और अन्य रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने राज्य द्वारा केंद्रीय जांच में दखल को “गंभीर मुद्दा” बताया और कहा कि अगर ऐसी हस्तक्षेप जारी रही तो “कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है”।

यह मामला कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस से संबंधित है, जिसमें आई-पैक (टीएमसी की चुनावी रणनीति बनाने वाली कंसल्टेंसी फर्म) की भूमिका की जांच हो रही है। अगली सुनवाई की तारीख जल्द तय होगी।

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