Hemant soren in road

रांची: जब ‘आम आदमी’ बन सड़क पर उतरे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, औचक निरीक्षण से प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप

Hemant soren in road
AI pic

रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कार्य करने का अंदाज अक्सर चर्चा में रहता है। रविवार शाम एक बार फिर मुख्यमंत्री रांची की सड़कों पर एक आम नागरिक की तरह बिना किसी सुरक्षा काफिले के निकले। कांके रोड से कांटाटोली चौक तक का सफर तय करते हुए उन्होंने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था की हकीकत देखी। कांटाटोली में अव्यवस्थित ट्रैफिक और अवैध पार्किंग देखकर उनका गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने मौके पर ही पुलिस अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

यह कोई पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री ने सुरक्षा की परवाह किए बिना सीधे जनता के बीच पहुंचकर व्यवस्था का जायजा लिया है। उनकी कार्यशैली में ‘फील्ड विजिट’ का यह तरीका अब एक पहचान बन चुका है।

प्रोजेक्ट भवन तक का वो चर्चित दौरा

मुख्यमंत्री के औचक निरीक्षणों के इतिहास में सबसे चर्चित घटना वह रही है, जब वे अकेले, बिना किसी सुरक्षाकर्मी के सीधे प्रोजेक्ट भवन (सचिवालय) पहुँच गए थे।

क्या था मामला: 28 अप्रैल 2026 जब एक सामान्य दिन में, बिना किसी पूर्व सूचना या तामझाम के मुख्यमंत्री खुद गाड़ी ड्राइव करते हुए या सामान्य तरीके से प्रोजेक्ट भवन पहुँचे थे।

अधिकारियों की प्रतिक्रिया: जब अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अचानक अपने बीच अकेले देखा, तो हड़कंप मच गया। सुरक्षाकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी एक पल के लिए समझ नहीं पाए कि आखिर हुआ क्या है।

उद्देश्य: इस दौरे का मकसद सरकारी कार्यालयों में समय की पाबंदी, अधिकारियों की उपस्थिति और फाइलों के निष्पादन की वास्तविक स्थिति को जानना था। वे जानना चाहते थे कि आम जनता के काम जिस गति से होने चाहिए, क्या वैसे हो रहे हैं या नहीं।

क्यों खास हैं ये औचक दौरे?

मुख्यमंत्री के इस प्रकार के मूवमेंट के पीछे कई राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश छिपे होते हैं:

1. जमीनी हकीकत: प्रोटोकॉल और सुरक्षा घेरे के बीच अक्सर अधिकारी और कर्मचारी मुख्यमंत्री को वही दिखाते हैं जो वे देखना चाहते हैं। लेकिन बिना सुरक्षा के निकलने पर मुख्यमंत्री को शहर की असली तस्वीर और जनता की परेशानियाँ सीधे देखने को मिलती हैं।

2. अधिकारियों में जवाबदेही: कदाचित कभी भी मुख्यमंत्री आ सकते हैं’, इस डर से प्रशासनिक अमले में एक डर बना रहता है, जिससे सरकारी कामकाज में लापरवाही कम होती है।
3. जनता से सीधा संवाद: जब मुख्यमंत्री बिना सुरक्षा के सड़क पर दिखते हैं, तो एक आम नागरिक का सत्ता पर भरोसा बढ़ता है कि राज्य का मुखिया उनकी समस्याओं से वाकिफ है।

पिछली घटनाओं का असर

13 दिसंबर 2025 को जब मुख्यमंत्री शहर की व्यवस्था देखने निकल पड़े थे । चाहे वह ट्रैफिक व्यवस्था हो, सफाई व्यवस्था हो या सरकारी दफ्तरों का कामकाज, असर ये हुआ की उनके दौरे के अगले ही दिन से प्रशासन सक्रिय मोड में आ जाता है। कांटाटोली चौक पर दी गई उनकी फटकार के बाद, अब यह उम्मीद की जा रही है कि रांची पुलिस अवैध पार्किंग और जाम की समस्या को लेकर कोई ठोस ‘ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान’ तैयार करेगी।

आलोचक भले ही इसे ‘पब्लिसिटी स्टंट’ कहें, लेकिन समर्थकों का मानना है कि ‘ऑन-ग्राउंड’ रहकर ही राज्य को सुचारू रूप से चलाया जा सकता है। मुख्यमंत्री की यह ‘ग्राउंड जीरो’ वाली स्टाइल आगामी दिनों में प्रशासनिक अधिकारियों की नींद उड़ाए रखने के लिए काफी है।

इसे भी पढ़े : 

सुप्रीम कोर्ट को मिले पांच नए न्यायाधीश, राष्ट्रपति मुर्मू ने नियुक्तियों को दी मंजूरी

झामुमो केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय के सिमडेगा दौरे की तैयारी तेज, 4 जून को होगा बूथ स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन

रांची में देर रात चला एंटी क्राइम चेकिंग और ड्रंक एंड ड्राइव अभियान, सड़क पर उतरे पुलिस अधिकारी

महिलाओं की मंईयां सम्मान योजना में पुरुष की एंट्री, फर्जीवाड़े का खुलासा; बीडीओ ने दर्ज कराई एफआईआर

नई और ताज़ा खबरों के लिए जुड़े रहें — Drishti Now